मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने वालों के लिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. सरकार ने कुछ ऐसी दवाओं की बिक्री पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी की है, जिन्हें डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं बेचा जाना चाहिए. इसके लिए मेडिकल स्टोर में CCTV कैमरे लगाना जरूरी करने का प्रस्ताव रखा गया है. यह बदलाव अभी ड्राफ्ट लेवल पर है, अभी आखिरी फैसला इसपर नहीं लिया गया है.
हेल्थ मिनिस्ट्री ने Drugs Rules, 1945 में बदलाव का मसौदा जारी किया है. इसका मकसद डॉक्टर की पर्ची वाली दवाओं की बिक्री पर नजर रखना है. सरकार चाहती है कि मेडिकल स्टोर पर दवा बेचने की प्रोसेस का रिकॉर्ड रहे. इससे अगर किसी दवा की गलत बिक्री की शिकायत आती है तो उसकी जांच आसानी से की जा सकेगी.
यह ड्राफ्ट मेन रूप से ग्रुप H, H1 और X दवाओं से जुड़ा है. H कैटेगरी में वो दवाएं शामिल हैं जिनका असर ज्यादा और तेजी होता है. इसमें कई आम एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर्स, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, एंटीहिस्टामाइन और अस्थमा के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं.
H1 कैटगरी में वाली दवा को सख्त निगरानी में रखा जाएगा. इनमें मुख्य रूप से पावरफुल एंटीबायोटिक्स जैसे सेफिक्सिम, सेफपोडोक्साइम, टीबी की दवाएं और आदत बनाने वाले कुछ एंग्जायटी व पेनकिलर साल्ट शामिल हैं.
X की लिस्ट में सबसे ज्यादा कंट्रोल्ड, नशीले और दिमाग पर गहरा असर डालने वाली हैबिट-फॉर्मिंग दवाएं आती हैं. इनमें मुख्य रूप से नींद की दवाएं, साइकोट्रॉपिक ड्रग्स, डिप्रेशन, मिर्गी और सेडेटिव्स शामिल हैं.
ड्राफ्ट के मुताबिक मेडिकल स्टोर में लगी CCTV रिकॉर्डिंग को कम से कम तीन महीने तक रखना होगा. कैमरों की मदद से यह देखा जा सकेगा कि डॉक्टर की पर्ची वाली दवा किस तरह बेची गई. इससे दवा की बिक्री से जुड़ी जांच को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है. लेकिन यह नियम अभी लागू नहीं हुआ है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने 8 सितंबर 2026 को इसका ड्राफ्ट जारी किया है.
अगर यह ड्राफ्ट लागू होता है तो डॉक्टर की पर्ची वाली दवा खरीदते समय मेडिकल स्टोर पर नियमों का पालन ज्यादा सख्ती से किया जा सकता है. इसका मकसद बिना पर्ची दवा मिलने की समस्या को कम करना और दवाओं की बिक्री में ज्यादा निगरानी लाना है. खासकर एंटीबायोटिक और दूसरी कंट्रोल्ड दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने पर ध्यान दिया जा रहा है.