कोविड-19 के कारण कई लोगों ने अपनों को खोया. सभी गिरे, संभले और फिर से अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए. हालांकि कई ऐसे थे जिनके दिमाग पर इसका काफी असर पड़ा. इनमें वो बच्चे भी शामिल हैं जिन्होंने कोविड-19 का कारण अपने मां या बाप या फिर दोनों को खो दिया. अब इन्हीं बच्चों की काउंसलिंग के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने पहल शुरू की है. ये देश में अपनी तरह की नई पहल है. इसमें बच्चों को मानसिक और संवेदनात्मक तौर पर मजबूत बनाया जाता है.
बच्चों के प्रति संवेदनशीलता व्यक्त करते हुए, महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक, मनोज राय कहते हैं, “अब पहले से भी कहीं ज्यादा जरूरत है कि इससे प्रभावित बच्चों के साथ जीवन भर खड़े रहेा जाए ताकि वे एक गुणवत्तापूर्ण जीवन जी सकें और इससे उबर सकें.”
जून 2021 में शुरू की गई थी योजना
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना जून 2021 में शुरू की गई थी. ये योजना उन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई थी जिन्होंने कोविड -19 के कारण माता या पिता या फिर दोनों को खो दिया है.
योजना के तहत की गई 11 हजार बच्चों की पहचान
बताते चलें कि उत्तर प्रदेश में इस योजना के तहत 11,000 से अधिक बच्चों की पहचान की गई है. मनोज राय बताते हैं, "यूनिसेफ और माइंड पाइपर (Mental Health Service Provider) के सहयोग से, डीसीपीयू (Child Protection Unit) के 4 कॉउंसलर और वन स्टॉप सेंटर मिलकर इसमें काम कर रहे हैं. इन से जुड़े लोगों को ट्रेन किया जा रहा है. ताकि वे ऐसे बच्चों की पहचान कर सकें जो अभी भी ट्रॉमा में हैं. कुल मिलाकर 75 जिलों के 300 कॉउंसलर को इसके लिए ट्रेनिंग दी जा रही है.”
काउंसलर्स को दी जा रही है ट्रेनिगं
टेनिंग के बाद ये काउंसलर इन बच्चों के घर जाते हैं और उन्हें ट्रॉमा-इंफोर्मेड कॉउंसलिंग देते हैं. मई, 2022 में जब एनालिसिस के लिए क्षेत्र का दौरा किया गया, तब यह पाया गया कि कुछ बच्चे ट्रॉमा से अभी भी बहार नहीं आए हैं. उनके दिमाग पर इसका काफी असर पड़ा है. इन ज्यादा गंभीर बच्चों को अब कॉउंसलिंग देने के लिए 40 कॉउंसलर को स्पेशल ट्रेनिंग दी जा रही है. ये बच्चों की मदद कर रहे हैं.