सभी मरीजों के लिए स्टेरॉयड नहीं है फायदेमंद, पढ़िए कोविड-19 रोगियों के लिए जारी नई गाइडलाइन

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि 60 साल से अधिक उम्र के लोग, या जिन्हें हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, एचआईवी, टीबी, क्रोनिक लंग या लिवर की बीमारी है या, सेरेब्रोवास्कुलर रोग या मोटापा जैसी अन्य स्थितियां हैं, उनमें गंभीर बीमारी होने का खतरा दूसरों से ज्यादा होता है.

Covid 19
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 18 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 7:42 AM IST
  • हाइपोक्सिया के मामलों में मरीजों को घर पर ही देखभाल की सलाह दी गई है
  • स्टेरॉइड्स से कई दूसरे इंफेक्शन जैसे म्यूकरमायकोसिस का खतरा हो सकता है

हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय ने वयस्कों के लिए 'क्लिनिकल गाइडेंस फॉर मैनेजमेंट ऑफ एडल्ट कोविड-19' रिलीज की है. इसमें रोगी को कौन सी दवाई या कैसे केस में किस तरह ट्रीट लिया जाना चाहिए बताया गया है. इसके अनुसार, कोविड रोगियों को ऑक्सीजन सप्लीमेंट की जरूरत न होने या डिस्चार्ज के बाद भी इंजेक्शन के माध्यम से स्टेरॉयड देने से कोई फायदा नहीं है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत एम्स, आईसीएमआर-कोविड-19 नेशनल टास्क फोर्स और जॉइंट मोनिटरिंग सिस्टम (DGHS) ने ये संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं.

इसमें यह भी कहा गया है कि एंटी-इंफ्लेमेट्री या इम्यूनोमॉड्यूलेटरी थेरेपी जैसे स्टेरॉइड्स से कई दूसरे इंफेक्शन जैसे म्यूकरमायकोसिस का खतरा हो सकता है. ये स्टेरॉयड की बहुत ज्यादा या जल्दी-जल्दी डोज देने से हो सकता है.  

क्या कहा गया है दिशानिर्देशों में?

दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि मेथिलप्रेडनिसोलोन इंजेक्शन का 0.5 से एक मिलीग्राम दो डोज में बांटकर, या डेक्सामेथासोन की एक समान खुराक, आमतौर पर कोविड के मध्यम मामलों में पांच से 10 दिनों की अवधि के लिए दी जा सकती है. वहीं, कोविड-19 के सीवियर मामलों में एक ही दवा को एक से दो मिलीग्राम/किलोग्राम की दो खुराकों में बांटकर दी जा सकती है. 

खांसी में क्या करें?

इनहेलेशनल बिडेसोनाइड जो मीटर्ड डोज इनहेलर या ड्राई पाउडर इनहेलर के माध्यम से दिया जाता है, पांच दिनों के लिए 800 एमसीजी बीडी की खुराक, कोरोना के हल्के सिम्पटम वालों को दी जा सकती है. अगर बुखार या खांसी 5 दिनों तक लगातार बनी रहती है यो इस खुराक को दिया जा सकता है.

इसमें कहा गया है कि अगर खांसी दो या तीन दिन से ज्यादा समय तक बनी रहती है, तो ट्यूबरक्लोसिस (TB) और अन्य स्थितियों की जांच का विकल्प चुनना चाहिए. 

रेमडिसिविर का उपयोग

संशोधित दिशानिर्देशों के मुताबिक, एमरजेंसी यूज ऑथोराइजेशन (EU) या रेमेडिसिविर के ऑफ-लेबल का उपयोग मॉडरेट से सीवियर मामलों में किया जा सकता है. इसमें उन रोगियों के लिए दवा के उपयोग को मना किया गया है जो ऑक्सीजन सपोर्ट या डोमेस्टिक सेटिंग में नहीं हैं.  ईयूए या टोसीलिज़ुमैब दवा के ऑफ-लेबल उपयोग को गंभीर बीमारी की उपस्थिति में उपयोग के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है, लेकिन केवल तब जब जब बहुत क्रिटिकल बीमारी हो या मरीज आसीयू में हो, उसके 24 से 48 घंटों के भीतर उसे दिया जा सकता है.

सांस की तकलीफ में क्या करें?

हल्की सांस की तकलीफ या हाइपोक्सिया के मामलों में।मरीजों को घर पर ही देखभाल की सलाह दी गई है. वहीं, यह भी कहा गया है कि हल्के कोविड मामलों में आहार सांस लेने में कठिनाई, तेज बुखार, या पांच दिनों से अधिक समय तक खांसी हो रही है, तो डॉक्टर के पास जाएं और जांच करवाएं. जिन लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है, जिनमें SpO2 90-93 प्रतिशत के बीच उतर और चढ़ रहा है, उन्हें मेडिकल वार्ड में भर्ती कराया जा सकता है. इन मामलों को मॉडरेट केस माना जाएगा. ऐसे रोगियों को ऑक्सीजन सपोर्ट देने की सलाह दी गई है. 

रेस्पिरेटरी रेट अगर 30 प्रति मिनट से ज्यादा है, सांस फूलने या 90 प्रतिशत से कम SpO2 दिखा रहा है तो इस मामले को क्रिटिकल केस माना जायेगा, और ऐसे रोगियों को आईसीयू में भर्ती होने की सलाह दी गई है. ऐसे मरीजों को रेस्पिरेटरी सपोर्ट पर रखा जाना चाहिए. 

किसे है ज्यादा खतरा?
 
गौरतलब है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि 60 साल से अधिक उम्र के लोग, या जिन्हें हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, एचआईवी, टीबी, क्रोनिक लंग या लिवर की बीमारी है या, सेरेब्रोवास्कुलर रोग या मोटापा जैसी अन्य स्थितियां हैं, उनमें गंभीर बीमारी होने का खतरा दूसरों से ज्यादा होता है.
 

 

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