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घर के पास स्ट्रीट फूड की दुकान होने से मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ता है: रिसर्च

कई रिहायशी इलाकों में फल-सब्जी बेचने वाली दुकानों की तुलना में अनहेल्दी फूड आउटलेट्स लगभग दोगुनी हैं. ऐसे में लोगों के पास हेल्दी विकल्प चुनने का मौका ही कम रह जाता है.

street food shops
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:36 PM IST
  • चेन्नई में 1000 से ज्यादा लोगों पर हुई स्टडी
  • एक्सरसाइज की जगह घरों से दूर

अगर आपके घर के पास हर गली में मोमो, चाउमीन, बर्गर और तले हुए स्नैक्स की दुकानें हैं, तो यह आपकी सेहत के लिए खतरे की घंटी हो सकती है. एक नई रिसर्च में सामने आया है कि घर के आसपास स्ट्रीट फूड और फास्ट फूड की दुकानें ज्यादा होने से मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता है. खासकर उन इलाकों में जहां हेल्दी खाने के विकल्प कम हैं और एक्सरसाइज की जगहें दूर हैं.

400 मीटर के दायरे में जंक फूड
रिसर्च के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति के घर से करीब 400 मीटर के दायरे में अनहेल्दी खाने के आउटलेट ज्यादा हैं, तो वहां रहने वाले लोग ज्यादा हाई-कैलोरी फूड खाते हैं. जल्दी और आसानी से मिलने वाला जंक फूड धीरे-धीरे रोजमर्रा की आदत बन जाता है. इसका सीधा असर वजन बढ़ने और ब्लड शुगर पर पड़ता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है.

हेल्दी दुकानों से दोगुनी जंक फूड शॉप्स
स्टडी में पाया गया कि कई रिहायशी इलाकों में फल-सब्जी बेचने वाली दुकानों की तुलना में अनहेल्दी फूड आउटलेट्स लगभग दोगुनी हैं. ऐसे में लोगों के पास हेल्दी विकल्प चुनने का मौका ही कम रह जाता है. जब आसपास तला-भुना और मीठा खाना आसानी से मिल जाए, तो लोग हेल्दी खाना छोड़ देते हैं.

चेन्नई में 1000 से ज्यादा लोगों पर हुई स्टडी
चेन्नई के करीब 1000 से ज्यादा लोगों पर की गई रिसर्च के दौरान प्रतिभागियों की लंबाई, वजन, कमर का घेराव और फास्टिंग ब्लड शुगर की जांच की गई. नतीजे साफ थे, जिन इलाकों में फास्ट फूड और स्ट्रीट फूड ज्यादा था, वहां मोटापा और ब्लड शुगर से जुड़ी समस्याएं भी ज्यादा पाई गईं.

डायबीसिटी बन रही है नई चिंता
डॉक्टर अब मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज के इस खतरनाक कॉम्बिनेशन को डायबीसिटी कह रहे हैं. शहरी भारत में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है, जहां खानपान और जीवनशैली दोनों बदल चुके हैं.

एक्सरसाइज की जगह घरों से दूर
रिसर्च में यह भी सामने आया कि कई लोग पार्क, जिम या खेल के मैदान से एक किलोमीटर से ज्यादा दूर रहते हैं. खराब वॉकिंग पाथ और लंबी दूरी के कारण लोग रोजाना एक्सरसाइज नहीं कर पाते. जब बॉडी की एक्टिविटी कम होती है तो मोटापा और डायबिटीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

पैसिव लाइफस्टाइल बना रही है बीमार
शोधकर्ताओं ने इसे पैसिव लाइफस्टाइल बताया है, जहां लोग कम चलते हैं, आसपास हेल्दी फूड नहीं मिलता और सुरक्षित एक्सरसाइज स्पेस भी नहीं होते. यह माहौल धीरे-धीरे शरीर को बीमारियों की ओर धकेल देता है. विशेषज्ञों का कहना है कि शहरों की प्लानिंग में हेल्दी फूड आउटलेट्स, फल-सब्जी मार्केट और पार्कों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए.

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