बढ़ती गर्मी में बच्चों को हो सकता है डिहाइड्रेशन... जानें लक्षण, कारण और बचाव के तरीके

छोटे बच्चों का शरीर बड़ों की तुलना में तापमान को नियंत्रित करने में उतना सक्षम नहीं होता. यही वजह है कि गर्मी में उनके शरीर से पसीने के रूप में पानी तेजी से निकलता है. अगर समय पर पानी न मिले, तो डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है.

dehydration symptoms
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 26 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:52 AM IST

देश के कई हिस्सों में गर्मी लगातार अपने तेवर दिखा रही है. तापमान में हो रही तेज बढ़ोतरी का असर अब आम जनजीवन के साथ-साथ छोटे बच्चों की सेहत पर भी साफ नजर आने लगा है. खासकर नवजात और छोटे बच्चों के लिए यह मौसम चुनौती बन सकता है. लू, पसीना और शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन बच्चों को जल्दी अपनी चपेट में ले सकता है. ऐसे में माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे इसके संकेतों को समय रहते पहचानें और बच्चों का खास ख्याल रखें.

छोटे बच्चों का शरीर बड़ों की तुलना में तापमान को नियंत्रित करने में उतना सक्षम नहीं होता. यही वजह है कि गर्मी में उनके शरीर से पसीने के रूप में पानी तेजी से निकलता है. अगर समय पर पानी न मिले, तो डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. बाहर खेलने वाले बच्चे, कमजोर इम्यूनिटी वाले और नवजात इस जोखिम में ज्यादा होते हैं. तो चलिए आपको बताते हैं कि बच्चों को डिहाइड्रेशन से कैसे बचाएं...

डिहाइड्रेशन के लक्षण कैसे पहचानें
डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है. अगर बच्चा बार-बार पानी मांग रहा है, उसके होंठ और मुंह सूख रहे हैं या वह सामान्य से ज्यादा चिड़चिड़ा हो गया है, तो सतर्क हो जाएं. इसके अलावा कम पेशाब आना या पेशाब का गहरा पीला रंग भी संकेत हो सकता है. कुछ मामलों में बच्चे की आंखें धंसी हुई लगती हैं और रोने पर आंसू भी कम आते हैं. अगर बच्चा बहुत ज्यादा सुस्त हो जाए, खेलने में रुचि न ले या शरीर में कमजोरी महसूस करे, तो यह गंभीर डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है.

बचाव के तरीके
गर्मी में बच्चों को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए सबसे जरूरी है उन्हें नियमित रूप से पानी पिलाना. सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि नारियल पानी, छाछ और घर का बना ओआरएस भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं. बच्चों को तेज धूप में ज्यादा देर तक खेलने से बचाएं. अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर ढककर रखें और हल्के कपड़े पहनाएं. साथ ही पौष्टिक और हल्का भोजन दें, ताकि शरीर को जरूरी ऊर्जा मिलती रहे. साफ-सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि संक्रमण से भी डिहाइड्रेशन बढ़ सकता है.

वहीं अगर बच्चे में बहुत ज्यादा सुस्ती, बार-बार उल्टी या पेशाब बिल्कुल बंद हो जाए, तो इसे नजरअंदाज न करें. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. समय पर इलाज मिलने से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है.

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