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World Cancer Day 2026: लाइलाज नहीं कैंसर! लक्षण जानिए और शुरुआत में ही इस गंभीर बीमारी को भगा दीजिए 

विश्व कैंसर दिवस हर साल 4 फरवरी को मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का मकसद लोगों को इस गंभीर बीमारी के बारे में जागरूक करना है. कैंसर कोई लाइलाज बीमारी अब नहीं है. इसके लक्षणों को शुरुआती समय में ही पहचान कर इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है.   

World Cancer Day 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:38 AM IST

विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) हर साल 4 फरवरी को मनाया जाता है. आज पूरी दुनिया में वर्ल्ड कैंसर डे मनाया जा रहा है. विश्व कैंसर दिवस को मनाने का मकसद लोगों को इस गंभीर बीमारी के बारे में जागरूक करना है. किसी भी व्यक्ति को यदि कैंसर की शिकायत होती है तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए क्योंकि समय पर इलाज शुरू होने से इस बीमारी से बचा जा सकता है. हमारे बीच कई ऐसे व्यक्ति हैं, जो कैंसर को मात देकर अब एक स्वस्थ जीवन जी रहे हैं. 

कैसे पड़ा कैंसर नाम, मानव में कब हुई इस बीमारी की पहचान 
फादर ऑफ मेडिसिन कहे जाने वाले हिप्पोक्रेट्स ने इस गंभीर बीमारी का नाम Carcinoma दिया था. इसे बाद में कैंसर बोला जाने लगा. हिप्पोक्रेट्स का मानना था कि कैंसर खून, पित्त और कफ के असंतुलन से होता है, जब ये बिगड़ जाता है तो शरीर की इम्यूनिटी कम हो जाती है, जो बाद में कैंसर का कारण बनती है. द कैंसर एटल्स के अनुसार मानव इतिहास में कैंसर का सबसे पुराना दस्तावेजी प्रमाण प्राचीन मिस्र से मिलता है. लगभग 3000 साल पहले मिस्र के एक व्यक्ति में पाए गए ट्यूमर को कैंसर का पहला ऑफिशियल मानव केस माना जाता है. 

कैंसर के लक्षणों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज 
हमारे देश में कुछ कैंसर 'साइलेंट किलर' की तरह पैर पसार रहे हैं. लोग कैंसर के शुरुआती लक्षणों को सामान्य कमजोरी या छोटी-मोटी बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और यही सबसे बड़ी गलती साबित होती है. डॉक्टरों के मुताबिक कैंसर के शुरुआती लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉक्टरों को मुताबिक हमारे देश में आज भी कैंसर के मामले अधिकतर एडवांस यानी आखिरी स्टेज के आसपास सामने आते हैं. ऐसे में इस बीमारी से छुटकारा पाना एक तरह से नामुमकिन हो जाता है. डॉक्टरों को मुताबिक कैंसर के लक्षणों की समय पर पहचान और सही इलाज ही इस जानलेवा बीमारी से बचने का एकमात्र तरीका है. कैंसर होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे गलत खान-पान, बढ़ता हुआ वायु प्रदूषण, शराब व धूम्रपान का सेवन, तनाव आदि. कैंसर के कई लक्षण है. चिंता की बात है कि अब कम उम्र में ही लोगों को कैंसर अपनी गिरफ्त में लेने लगी है. 

लगातार वजन कम होना
इस गंभीर बीमारी का सबसे आम लक्षण है वजन का बिना वजह कम होना. जैसे आप वजन घटना के लिए कोई एक्सरसाइज नहीं कर रहे हैं, पहले की तरह ही खाना खा रहे हैं, अपनी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं किए हैं, इसके बावजूद आपका वजन लगातार घट रहा है तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है. ऐसे लक्षम पेट, फेफड़े या अग्न्याशय के कैंसर में देखा जाता है.

हमेशा थकान 
यदि आपका खान-पान ठीक है. आप अच्छी नींद लेते हैं, समय पर सोते और जगते हैं. इसके बावजूद हमेशा थकान बनी रहती है, शरीर में कमजोरी महसूस होती है तो यह कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है. ऐसे लक्षण अमूमन ब्लड कैंसर में देखे जाते हैं. शरीर में कहीं दर्द है और यह आराम करने के बावजूद कम नहीं हो रहा है तो यह भी कैंसर का लक्षण हो सकता है.

स्किन में बदलाव होना
कई बार स्किन में बदलाव भी कैंसर का लक्षण हो सकता है. जैसे शरीर में गांठ होना, स्किन पर निकले तिल के रंग में बदलाव, स्किन पर घाव का आसानी से ठीक न होना. मल के रास्ते खून आना, मुंह में छाले जो ठीक न हो. बार -बार कब्ज, बार-बार पाचन में परेशानी बने रहना भी कैंसर का लक्षण हो सकता है.

हमारे देश में ये कैंसर लोगों को बना रहे सबसे अधिक अपना शिकार
ब्रेस्ट कैंसर
हमारे देश में ब्रेस्ट कैंसर के मामले काफी बढ़ गए हैं. यह जानलेवा बीमारी महिलाओं में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है. नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च की 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक महिला रोगियों में कैंसर के लगभग 39.4 प्रतिशत मामले स्तन कैंसर के होते हैं. अब यह बीमारी कम उम्र की महिलाओं को भी अपनी चपेट में लेने लगी है. स्तन कैंसर के लक्षणों में स्तन पर गांठ का बढ़ना, स्तन के आकार या आकार में बदलाव, त्वचा का छिलना, निप्पल से स्राव आदि शामिल हैं. डॉक्टरों के मुताबिक स्तन पर गांठ है लेकिन उसमें दर्द नहीं है तो भी इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. तुरंत इलाज कराना चाहिए. 

फेफड़ों का कैंसर
हमारे देश में फेफड़ों यानी लंग्स का कैंसर भी जानलेवा साबित हो रहा है. इस कैंसर का प्रमुख कारण बढ़ता प्रदूषण और पैसिव स्मोकिंग हैं. फेफड़ों के कैंसर के लक्षण अक्सर तब पता चलता है जब यह बीमारी गंभीर स्टेज पर पहुंच जाती है. फेफड़ों के कैंसर के लक्षणों में लगातार खांसी, खांसी में खून आना, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, अचानक वजन कम होना आदि शामिल हैं.

ओरल कैंसर
मुंह के कैंसर यानी ओरल कैंसर का प्रमुख कारण तंबाकू की लत है. यह कैंसर पुरुषों में सबसे आम है और महिलाओं में पांचवां सबसे आम कैंसर (सभी कैंसर मामलों का 4.3 प्रतिशत) है. ओरल कैंसर के लक्षणों में मुंह में छोटे घाव, लाल धब्बे या छाले जो जल्दी ठीक नहीं होते हैं. सफेद या लाल पैच, आवाज में भारीपन या निगलने में तकलीफ होना आदि हैं.  ओरल कैंसर अक्सर बहुत देर से पता चलता है क्योंकि लोग कैंसर के शुरुआती लक्षणों को तेज चूना खाना या फिर सामान्य छाले समझकर अनदेखा कर देते हैं.

सर्वाइकल कैंसर
हमारे देश में कैंसर से होने वाली महिलाओं की मौत में दूसरा सबसे बड़ा कारण सर्वाइकल कैंसर है. मेडिकल जर्नल द लांसेट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर सर्वाइकल कैंसर के कारण होने वाली 40 प्रतिशत मौतों में से 23 प्रतिशत भारत से और 17 प्रतिशत चीन से थीं. सर्वाइकल कैंसर से होने वाली चार में से एक मौत भारत में होती है. इस कैंसर के लक्षणों में अस्पष्टीकृत योनि से रक्तस्त्राव, दर्दनाक संभोग, योनि में दर्द, पीरियड साइकिल के बीच में या इंटरकोर्स के बाद ब्लीडिंग होना, पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द और असामान्य डिस्चार्ज होना आदि शामिल हैं. इस कैंसर को समय पर स्क्रीनिंग और वैक्सीन के जरिए रोका जा सकता है. 

एसोफेगाल कैंसर 
एसोफेगाल कैंसर भी घातक है. यह तब होता है, जब कैंसर कोशिकाएं आपके एसोफैगस या भोजन नली के अंदर बढ़ती हैं. Cancerindia.org पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार एसोफेगाल कैंसर भारत में छठा सबसे आम कैंसर है. इसके लक्षणों में भोजन निगलने में कठिनाई, लगातार अपच, पेट साफ न होना, मल के साथ खून आना, पेट में मरोड़, खांसी, अनियंत्रित वजन घटना आदि शामिल हैं. जंक फूड और कम फाइबर वाली डाइट के कारण आजकल युवाओं में कोलोरेक्टल (कोलन) कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. 


 

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