हर साल 12 मार्च को वर्ल्ड किडनी डे मनाया जाता है. इसका मकसद लोगों को किडनी की सेहत के बारे में जागरूक करना और किडनी से जुड़ी बीमारियों की समय रहते पहचान करना है. इस साल यह दिन ग्रीन नेफ्रोलॉजी दिवस के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ स्वास्थ्य सेवाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा.
भारत में 13.8 करोड़ लोग किडनी डिजीज से पीड़ित
भारत में किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. हेल्थ जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित एक वैश्विक अध्ययन के मुताबिक साल 2023 में भारत में करीब 13.8 करोड़ लोग क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित थे. हार्ट डिजीज के बाद यह देश में दूसरी सबसे बड़ी बीमारी बनती जा रही है.
वर्ल्ड किडनी डे के मौके पर GNT ने मेदांता अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट डॉ. लोवी गौर से बातचीत की और किडनी हेल्थ से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब जानने की कोशिश की.
किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
डॉ. लोवी बताती है, किडनी की बीमारियों को अक्सर साइलेंट डिजीज कहा जाता है, क्योंकि इनके लक्षण काफी देर से दिखाई देते हैं.
किडनी का मुख्य काम शरीर से विषैले तत्व और एक्स्ट्रा पानी को बाहर निकालना होता है. जब किडनी सही तरीके से काम नहीं करती तो शरीर में कुछ संकेत दिखने लगते हैं.
अगर आपके पैरों में सूजन हो रही हो, आंखों या चेहरे के आसपास सूजन दिखाई दे, पेशाब की मात्रा कम हो या रात में बार-बार पेशाब आए तो हो सकता है से किडनी की बीमारी की शुरुआत हो. कुछ मामलों में पेशाब का रंग भी बदल सकता है और वह लाल या कोला रंग जैसा दिखाई दे सकता है.
बीमारी के ज्यादा बढ़ने पर उल्टी, भूख कम लगना, थकान और सांस फूलने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं. हालांकि कई मामलों में बीमारी लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के भी रह सकती है.
किडनी को हेल्दी रखने के लिए रोजाना कितना पानी पीना चाहिए?
लोगों के मन में अक्सर यह सवाल होता है कि किडनी को स्वस्थ रखने के लिए रोज कितना पानी पीना चाहिए.
डॉ. गौर के मुताबिक शरीर में पानी की मात्रा को नियंत्रित करने का एक प्राकृतिक तरीका होता है, जिसे प्यास कहा जाता है. सामान्य और स्वस्थ व्यक्ति के लिए प्यास लगने पर पानी पीना ही पर्याप्त होता है. हालांकि गर्मियों में, ज्यादा शारीरिक गतिविधि करने पर या ज्यादा गर्म मौसम में शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत पड़ सकती है. वहीं जिन लोगों को किडनी, दिल या लीवर से जुड़ी बीमारियां हैं उन्हें पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए.
कैसे पता चले कि किडनी सही काम नहीं कर रही?
डॉक्टर बताते हैं कि लगभग 90% किडनी की बीमारियां शुरुआती चरण में बिना लक्षण के रहती हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर इनका पता लगाना मुश्किल होता है.
ऐसे में किडनी की स्थिति जानने के लिए ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट बेहद जरूरी होते हैं.
खासकर उन लोगों को नियमित जांच करानी चाहिए जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, किडनी स्टोन या परिवार में किडनी रोग की हिस्ट्री हो. समय-समय पर जांच कराने से बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ना संभव हो जाता है और इलाज आसान हो सकता है.
किन चीजों से किडनी को नुकसान पहुंच सकता है?
खानपान का किडनी की सेहत पर सीधा असर पड़ता है. डॉ. गौर के मुताबिक ज्यादा नमक का सेवन ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है, जो किडनी के लिए नुकसानदायक है.
इसी तरह ज्यादा शुगर लेने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है और मोटापा व मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जो किडनी रोग का खतरा बढ़ाती हैं.
किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार खास तरह के खानपान से बचना पड़ सकता है. सामान्य तौर पर किडनी के लिए ऐसा आहार बेहतर माना जाता है जिसमें साबुत अनाज, फल, सब्जियां और संतुलित मात्रा में प्रोटीन शामिल हो.
इसके अलावा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा नमक-शुगर वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना बेहतर होता है.
किडनी को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?
किडनी को हेल्दी रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों को जरूर अपनाना चाहिए.
डॉ. बताते हैं कि शरीर को पर्याप्त पानी देना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना और स्वस्थ वजन बनाए रखना बेहद जरूरी है.
इसके अलावा धूम्रपान से बचना, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखना भी किडनी की सेहत के लिए अहम है.
लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर दवाओं का सेवन करने से भी किडनी को नुकसान हो सकता है, इसलिए इनका इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए.