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आठ साल के पल साक्षी को मिला प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2022, कोरोना काल में म्यूजिकल चैरिटी शो कर लोगों की मदद के लिए जुटाया था फंड

24 जनवरी 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 29 बच्चों को प्रधान मंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से नवाजा. इन बच्चों में बिहार में छपरा शहर के साहेबगंज मुहल्ला निवासी पल साक्षी भी शामिल थे. आठ साल के पल साक्षी को समाज सेवा की केटेगरी में चयनित कर सम्मानित किया गया है. 

Pal Sakshi got PMRBP 2022
gnttv.com
  • छपरा,
  • 25 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 11:43 AM IST
  • कोरोना काल में की लोगों की मदद
  • मिला प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2022

24 जनवरी 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 29 बच्चों को प्रधान मंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से नवाजा. इन बच्चों में बिहार में छपरा शहर के साहेबगंज मुहल्ला निवासी पल साक्षी भी शामिल थे. आठ साल के पल साक्षी को समाज सेवा की केटेगरी में चयनित कर सम्मानित किया गया है. 

कोरोना काल होने के कारण विगत 2021 से इस कार्यक्रम को ऑनलाइन वर्चुअल माध्यम से ही आयोजित किया जा रहा है. पल साक्षी को उनके पिता और माता की मौजूदगी के साथ-साथ सारण के जिलाधिकारी राजेश मीणा सहित तमाम आलाधिकारियों की उपस्थिति में सम्मान मिला.

कोरोना काल में की मदद: 

छपरा के केंद्रीय विद्यालय में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले पल साक्षी बहुत अच्छा गाते हैं. और अपननी इस काबिलियत का फायदा उन्होंने कोरोना काल में लोगों की मदद के लिए उठाया. पल साक्षी ने गुड न्यूज़ टुडे को बताया कि कोरोना काल मे जब लॉक डाउन लगा था तो उन्होंने लोगो की मदद करने के लिये ऑनलाइन गाना गाना शुरू किया. 

उन्होंने अपने गाने मे लोगो से अपील की कि अगर उनको मेरा गाना पसन्द आया तो जरूरतमंद की मदद करने के लिए ऑनलाइन मदद करे. इस अभियान में उसके पास 10 हजार रुपये इकट्ठा हुए. इस राशि को उन्होंने अपने माता पिता के सहयोग से PMCARE फंड में डोनेट किया. 

इसी तरह उन्होंने गरीब बच्चों को कॉपी-किताब पहुंचाने में भी मदद की. लोगो को मास्क दिया और जागरूकता बढ़ाने का काम किया. 

माता-पिता के सहयोग से किए अच्छे काम:  

पल साक्षी की मां रश्मिता साह स्वयं केंद्रीय विद्यालय, छपरा में शिक्षिका हैं. पिता मनीष साह व्यवसायी है. उन्होंने पल साक्षी को 3 वर्ष की उम्र से ही हारमोनियम और संगीत की शिक्षा दिलवानी शुरू कर दी थी. साथ ही, छोटी उम्र में ही शतरंज जैसे खेल की तरफ भी ध्यान मोड़ा. 

उन्होंने शतरंज और संगीत की कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार हासिल किये हैं. उनकी मां रश्मिता अपने बेटे की इस उपलब्धि पर खुश हैं. उन्होंने सभी का हाथ जोड़कर धन्यवाद किया. पिता मनीष साह ने भी अपने पुत्र की इतनी बड़ी सफलता और सम्मान मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि सम्मान मिलने के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ गई है. 

उनका कहना है कि सभी बच्चों में कुछ न कुछ क्वालिटी होती है. सभी माता पिता को बच्चों की साथ लर्नर बनकर पेश आना चाहिए न कि शिक्षक बनकर. बच्चों के साथ सही व्यवहार करने से बच्चा बहुत आगे जा सकता है. दुनिया का आठवां अजूबा भी बन सकता है. 

(छपरा से आलोक कुमार जैसवाल)

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