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अनुराग ढांडा ने हरियाणा सरकार को घेरा, कहा- एक तो अध्यापक कम, ऊपर से जनगणना कार्य…

हरियाणा में शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी को लेकर सियासत तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. चलिए आपको बताते हैं पूरा मामला क्या है.

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 06 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:44 PM IST

हरियाणा में शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी को लेकर सियासत तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे स्कूलों में अध्यापकों को जनगणना कार्य में लगाकर सरकार छात्रों की पढ़ाई को बाधित कर रही है. अनुराग ढांडा ने कहा कि कई स्कूलों में सभी शिक्षकों और स्टाफ की ड्यूटी जनगणना में लगा दी गई है. ऐसे में छात्रों की पढ़ाई ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. उनका आरोप है कि इस स्थिति के कारण बच्चों को मजबूरन छुट्टी पर भेजा जा रहा है.

शिक्षकों की भारी कमी के बीच बढ़ी चिंता
ढांडा ने आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरते हुए बताया कि प्रदेश में कुल 15,451 शिक्षकों के पद खाली हैं. इनमें पीजीटी के 3998, टीजीटी और हेडमास्टर के 7707 और पीआरटी व प्रधान शिक्षक के 3746 पद शामिल हैं. उन्होंने कहा कि नूंह में सबसे ज्यादा 4954 पद खाली हैं. इसके अलावा यमुनानगर, पलवल, गुरुग्राम और फरीदाबाद सहित कई जिलों में भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है. उन्होंने यह भी बताया कि हरियाणा के 298 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी नियमित शिक्षक नहीं है, जबकि 1051 स्कूलों में केवल एक शिक्षक के सहारे पढ़ाई चल रही है. ऐसे हालात में शिक्षकों को जनगणना में भेजना शिक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है.

स्कूलों में पढ़ाई और सुरक्षा पर सवाल
ढांडा ने उदाहरण देते हुए अनुराग ढांडा ने कहा कि अंबाला के कई स्कूलों में केवल 3 से 5 शिक्षक हैं और सभी को जनगणना ड्यूटी पर लगा दिया गया है. वहीं कुछ स्कूलों में तो इकलौते शिक्षक को भी प्रशिक्षण के लिए भेजने के आदेश दिए गए हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन संभालेगा?

किताबों की कमी ने बढ़ाई परेशानी
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बावजूद छात्रों को अभी तक मुफ्त किताबें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं. जींद और यमुनानगर सहित कई जिलों में बाल वाटिका से लेकर नौवीं कक्षा तक की किताबें नहीं पहुंची हैं. इसके कारण शिक्षक पुराने सिलेबस से पढ़ाने को मजबूर हैं.

सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप
अनुराग ढांडा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह फैसला दर्शाता है कि सरकार को शिक्षा से कोई सरोकार नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न तो शिक्षकों की भर्ती कर पा रही है और न ही मौजूदा व्यवस्था को ठीक से चला पा रही है.

ढांडा ने कहा कि शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाना प्रशासनिक दृष्टि से भी गलत है और यह सेवा नियमों का उल्लंघन करता है. इससे शिक्षकों के मनोबल पर भी असर पड़ा है. उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत इस आदेश को वापस ले और जरूरत पड़ने पर अलग से कर्मचारियों की भर्ती करे.

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