मतदाता सूची की गड़बड़ियों को दूर करने के लिए निर्वाचन आयोग की ओर से कराए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के लिए अब समाजवादी पार्टी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जिलेवार प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है. यह ठीक उसी तरह है जैसे चुनावी मौसम में स्टार प्रचारकों की लिस्ट होती है.
कई नेताओं को दो-दो जिलों की जिम्मेदारी
समाजवादी पार्टी की ओर से 44 राष्ट्रीय पदाधिकारियों को हर जिले में एसआईआर की निगरानी करने और समर्थक मतदाताओं के नाम सूची में शामिल कराने की जिम्मेदारी दी गई है. कई नेताओं को दो-दो जिलों का प्रभार दिया गया है. पार्टी की ओर से जारी सूची के मुताबिक पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बलराम यादव को आजमगढ़, शिवपाल यादव को इटावा और बदायूं, विशम्भर प्रसाद निषाद को बांदा और फतेहपुर, अवधेश प्रसाद को अयोध्या, इन्द्रजीत सरोज को प्रयागराज और कौशांबी की जिम्मेदारी दी गई है. इसी प्रकार रामजी लाल सुमन को आगरा और हाथरस, लालजी वर्मा को अंबेडकरनगर, राम अचल राजभर को वाराणसी, हरेन्द्र मलिक को मुजफ्फरनगर और सहारनपुर और नीरज पाल को बागपत में एसआईआर के लिए प्रभारी बनाया गया है.
बीएलओ की सूची और बूथ प्रभारियों की सूची की समीक्षा करने का निर्देश
राष्ट्रीय सचिवों में कमाल अख्तर को मुरादाबाद और संभल, डॉ. मधु गुप्ता को लखनऊ जिला, ओमप्रकाश सिंह को गाजीपुर, राजीव राय को मऊ और बलिया और अभिषेक मिश्रा को लखनऊ महानगर का प्रभारी बनाया गया है. सभी नेताओं को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में तत्काल विधानसभावार भ्रमण करते हुए बीएलओ की सूची और बूथ प्रभारियों की सूची की समीक्षा कर लें. इसमें इस बात पर विशेष फोकस करें कि एसआईआर के लिए बूथवार कितने प्रपत्र बंट गए हैं, कितने जमा हुए और कितने अपलोड हो गए. साथ ही समीक्षा के बाद रिपोर्ट पार्टी मुख्यालय को भी उपलब्ध कराएं.
पिछड़े दलितों का वोट काटने का आरोप
सपा सांसद राजीव राय ने बताया कि SIR के जरिए पिछड़े दलितों का वोट काटने की साजिश हो रही है. मुझे मऊ और बलिया की जिम्मेदारी मिली है और कल जब मैंने खुद पता किया तो पता लगा कि मऊ की सदर विधान सभा से लगभग 20 हजार नामों को डिलीट कर दिया गया है. किसी का बूथ संख्या तक नहीं दिया गया, जिससे कि वेरिफाई भी न हो पाए. हमारी कोशिश है कि अखिलेश यादव निर्देश पर हम PDA प्रहरी के जरिए सभी सबूतों को इक्कठा कर साजिशों को चुनाव आयोग के सामने आए और जिनके नाम हट गए हैं कि उनके नाम वापस जोड़े जाए और किसी के नाम न काटे जाएं. बता दें, इस बीच अखिलेश यादव और डिंपल यादव की तरफ से यह बयान भी आया है कि SIR को बढ़ा देना चाहिए क्योंकि अभी यूपी का चुनाव होने काफी समय शेष है.