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21 साल की प्रेरणा बनीं सरपंच, 387 वोटों से हासिल की जीत... पढ़ाई के साथ संभालेंगी गांव की कमान

निकाय चुनाव के बाद अब पंचायत चुनाव में भी जेनजी का कमाल देखने को मिला है. उम्र महज 21 साल, लेकिन सोच और इरादे गांव की तस्वीर बदलने के. जिस उम्र में युवा अपने भविष्य और करियर को संवारने में जुटे रहते हैं, उस उम्र में अलवर जिले की रैणी पंचायत समिति की गढ़ ग्राम पंचायत की प्रेरणा ने सरपंच बनकर गांव की जिम्मेदारी संभाल ली है.

Prerna Become Sarpanch
हिमांशु शर्मा
  • अलवर,
  • 02 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:56 PM IST

जिस उम्र में युवा अपने करियर और भविष्य को बनाने में जुटे रहते हैं, उस उम्र में राजस्थान की एक बेटी ने पूरे गांव की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली है. महज 21 साल की उम्र में सरपंच बनकर प्रेरणा ने साबित कर दिया कि बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है. अलवर जिले की रैणी पंचायत समिति की गढ़ ग्राम पंचायत से चुनाव जीतने वाली प्रेरणा जयपुर में फिजियोथेरेपी की पढ़ाई कर रही हैं. उन्होंने सरपंच चुनाव में 387 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है. अब उनका सपना गांव की तस्वीर बदलने और बेटियों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर देने का है.

परिवार से मिली समाजसेवा की सीख
प्रेरणा के परिवार का राजनीति और समाजसेवा से पुराना नाता रहा है. उनके पिता तेजवीर सिंह साल 2015 में गढ़ ग्राम पंचायत के सरपंच रह चुके हैं. वहीं, उनके नाना-नानी भी सरपंच की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. बचपन से ही परिवार में ग्रामीण राजनीति और जनसेवा का माहौल देखने वाली प्रेरणा की रुचि भी गांव के विकास में बढ़ती गई. इस बार सरपंच पद महिला के लिए आरक्षित हुआ तो उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया. परिवार के सहयोग और ग्रामीणों के समर्थन से उन्हें जीत मिली.

दूसरे गांवों को देखकर आया बदलाव का ख्याल
प्रेरणा बताती हैं कि जयपुर में पढ़ाई के दौरान जब भी वह अपने गांव आती थीं, तो आसपास के विकसित गांवों को देखकर उन्हें अपने गांव की स्थिति सुधारने का ख्याल आता था. गढ़ गांव में कई जगह सड़कें खराब हैं और नालियों की व्यवस्था भी ठीक नहीं है. शिक्षा और रोजगार के अवसरों की कमी भी एक बड़ी समस्या है. उनका मानना है कि पहले उनके पिता के कार्यकाल में कई विकास कार्य हुए थे, लेकिन पिछले कुछ सालों में विकास की रफ्तार धीमी हो गई. इसी बदलाव की उम्मीद के साथ उन्होंने चुनाव लड़ा.

गांव में लाइब्रेरी बनवाना पहली प्राथमिकता
सरपंच बनने के बाद प्रेरणा का सबसे बड़ा फोकस गांव की बेटियों की शिक्षा पर है. वह चाहती हैं कि ग्राम पंचायत में एक अच्छी लाइब्रेरी बनाई जाए, जहां लड़कियां और युवा सुरक्षित माहौल में बैठकर पढ़ाई कर सकें. उनका मानना है कि कई परिवार अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में नहीं भेज पाते. ऐसे में गांव में ही लाइब्रेरी बनने से उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और दूसरी पढ़ाई की तैयारी करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी दिलाकर उनका लाभ पहुंचाना भी उनकी प्राथमिकता है.

सालार बाबा धाम का भी कराएंगी विकास
प्रेरणा का विकास प्लान सिर्फ गढ़ गांव तक सीमित नहीं है. वह पंचायत के बाकी दो गांवों में भी सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाएं बेहतर करना चाहती हैं. इसके अलावा कब्रिस्तान के पास जगह की समस्या दूर करना और ऐतिहासिक सालार बाबा धाम का विकास करवाना भी उनके एजेंडे में शामिल है. वह चाहती हैं कि धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें.

पढ़ाई के साथ संभालेंगी गांव की जिम्मेदारी
प्रेरणा की फिजियोथेरेपी की पढ़ाई लगभग पूरी हो चुकी है और फिलहाल वह इंटर्नशिप कर रही हैं. ऐसे में पढ़ाई के साथ सरपंच की जिम्मेदारी निभाना उनके लिए चुनौती होगी. हालांकि, उनका कहना है कि ग्रामीणों ने जिस भरोसे के साथ उन्हें चुना है, उस पर खरा उतरना उनकी पहली जिम्मेदारी है. वह गांव के युवाओं को भी विकास कार्यों से जोड़ना चाहती हैं, ताकि सबकी भागीदारी से पंचायत की तस्वीर बदली जा सके.

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