अमरावती की 17 साल की तीरंदाज कुमकुम मोहोड ने एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन के बाद एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है. भारतीय ओलंपिक संघ ने उन्हें नए शुरू किए गए जसपाल राणा पुरस्कार की पहली विजेता चुना है. कुमकुम ने जापान के आइची-नागोया में हुए एशियन गेम्स में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा था. कुमकुम मोहोड ने महज 17 साल की उम्र में एशियन गेम्स में डेब्यू किया और अपने प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया. उन्होंने महिला रिकर्व टीम इवेंट में अंकिता भकत और कीर्ति के साथ मिलकर भारत को गोल्ड मेडल दिलाया. इस जीत की खास बात यह रही कि भारतीय टीम ने महिला रिकर्व में दक्षिण कोरिया के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को खत्म किया. कुमकुम की टीम की इस कामयाबी ने भारतीय तीरंदाजी के लिए एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की.
व्यक्तिगत स्पर्धा में भी जीता गोल्ड
टीम इवेंट में गोल्ड जीतने के बाद कुमकुम ने महिला रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा में भी शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने इस स्पर्धा में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया. एशियन गेम्स में कुमकुम ने कुल दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता. उनके इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद भारतीय ओलंपिक संघ ने उन्हें नए शुरू किए गए जसपाल राणा पुरस्कार की पहली विजेता घोषित किया.
पीटी उषा ने कुमकुम की तारीफ की
भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष डॉ. पी. टी. उषा ने कुमकुम को पुरस्कार की पहली विजेता चुने जाने को उचित बताया. उन्होंने कहा कि दबाव में कुमकुम का संयम और कठिन परिस्थितियों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की क्षमता भारतीय तीरंदाजी के लिए शुभ संकेत है. पीटी उषा ने यह भी कहा कि कुमकुम और उनकी रिकर्व टीम की कामयाबी ने भारतीय तीरंदाजी के सामने मौजूद कई बाधाओं को दूर किया है.
ओलंपिक की राह पर भी बढ़ाया कदम
कुमकुम की उपलब्धि सिर्फ एशियन गेम्स के मेडल तक सीमित नहीं रही. उनके व्यक्तिगत गोल्ड मेडल के साथ भारत को 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए एक कोटा स्थान भी हासिल हुआ है. यानी एशियन गेम्स में इतिहास रचने के बाद अमरावती की यह युवा तीरंदाज अब ओलंपिक की राह पर भी एक बड़ा कदम बढ़ा चुकी है. 17 साल की उम्र में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीतने के बाद कुमकुम को मिला पहला जसपाल राणा पुरस्कार उनकी उपलब्धियों में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है.
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