scorecardresearch

डांडिया नहीं हाथों में तलवार, अकोला में अनोखे गरबा की तैयारी, आत्मरक्षा के भी सिखाए जा रहे गुर

महाराष्ट्र के अकोला में नवरात्रि से पहले गरबा का अनोखा अंदाज देखने को मिल रहा है. यहां महिलाएं और युवतियां डांडिया की जगह तलवार लेकर गरबा की प्रैक्टिस कर रही हैं. विश्व हिंदू परिषद की दुर्गा वाहिनी की इस पहल में गरबा के साथ तलवारबाजी, आत्मबल और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

Advertisement
तलवार से डांडिया खेलेंगी महिलाएं तलवार से डांडिया खेलेंगी महिलाएं

नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के लिए गरबा और डांडिया खेला जाता है. लेकिन महाराष्ट्र के अकोला में इस बार गरबा का अंदाज कुछ अलग नजर आ रहा है. यहां डांडिया की जगह महिलाओं और युवतियों को हाथों में तलवार लेकर गरबा करने की प्रैक्टिस कराई जा रही है. विश्व हिंदू परिषद की दुर्गा वाहिनी की ओर से चल रही इस पहल में गरबा के साथ महिलाओं को तलवारबाजी के गुण भी सिखाए जा रहे हैं. इसका मकसद भक्ति के साथ शक्ति, आत्मबल और आत्मरक्षा का संदेश देना है.

डांडिया की जगह हाथों में तलवार
अकोला में नवरात्रि से पहले गरबा की प्रैक्टिस चल रही है. ढोल की थाप और गरबा के पारंपरिक स्टेप्स के बीच महिलाएं और युवतियां हाथों में तलवार लेकर अभ्यास करती नजर आ रही हैं. प्रशिक्षण के दौरान उन्हें तलवार पकड़ने और गरबा के दौरान उसके इस्तेमाल की तकनीक समझाई जा रही है. गरबा के स्टेप्स के साथ तलवार संभालने और संतुलन बनाए रखने की भी प्रैक्टिस कराई जा रही है.

गरबा के साथ सिखाए जा रहे तलवारबाजी के गुर
गरबा को मां दुर्गा की आराधना का एक स्वरूप माना जाता है. इसी भक्ति को शक्ति से जोड़ते हुए विश्व हिंदू परिषद की दुर्गा वाहिनी की ओर से महिलाओं और युवतियों को तलवारबाजी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. फिलहाल यह आयोजन प्रशिक्षण और प्रैक्टिस के दौर में है. इसमें गरबा के पारंपरिक स्टेप्स के साथ हाथ में तलवार संभालना, संतुलन बनाए रखना और तलवारबाजी की बुनियादी तकनीक सिखाई जा रही है.

आत्मबल और आत्मरक्षा पर जोर
आयोजकों का कहना है कि इस पहल का मकसद सिर्फ गरबा को अलग अंदाज देना नहीं है. इसके जरिए महिलाओं और युवतियों में आत्मबल बढ़ाने के साथ उन्हें आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया जा रहा है. विश्व हिंदू परिषद अकोला के जिलाध्यक्ष राजेश मंजुलकर के मुताबिक, गरबा भक्ति का प्रतीक है, लेकिन इसी भक्ति के साथ महिलाओं में शक्ति और आत्मविश्वास का भाव पैदा करने के लिए तलवार के साथ गरबा की यह पहल की गई है.

प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में हो रही प्रैक्टिस
तलवारबाजी एवं गरबा प्रशिक्षक अग्रणी ताकवाले के मार्गदर्शन में महिलाएं और युवतियां तलवार के साथ गरबा के स्टेप्स की प्रैक्टिस कर रही हैं. प्रशिक्षण के दौरान तलवार को सुरक्षित तरीके से संभालने और गरबा के दौरान उसका संतुलित इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है. प्रशिक्षण में महिलाएं ग्रुप में तलवार लेकर गरबा के स्टेप्स दोहराती नजर आ रही हैं. तलवार को ऊपर उठाकर गरबा करने के साथ अलग-अलग स्टेप्स की भी प्रैक्टिस कराई जा रही है.

पहले ही साल 200 से ज्यादा एंट्री का दावा
आयोजकों के मुताबिक, इस प्रशिक्षण को महिलाओं और युवतियों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है. पहले ही वर्ष 200 से अधिक एंट्री मिलने का दावा किया गया है. आयोजकों के अनुसार, गरबा जहां मां की आराधना और भक्ति का स्वरूप है, वहीं तलवार शौर्य और शक्ति का प्रतीक है. इसी सोच के साथ अकोला में गरबा को आत्मबल और आत्मरक्षा के संदेश से जोड़ा गया है.

भक्ति के साथ शक्ति का संदेश
अकोला में नवरात्रि से पहले चल रही इस खास प्रैक्टिस में गरबा के पारंपरिक अंदाज के साथ तलवारबाजी को जोड़ा गया है. महिलाएं और युवतियां गरबा के स्टेप्स सीखने के साथ तलवार संभालने का अभ्यास कर रही हैं. मां की आराधना के लिए गरबा और खुद की सुरक्षा के लिए आत्मबल, इसी सोच के साथ अकोला में तलवार के साथ गरबा की प्रैक्टिस फिलहाल जारी है. नवरात्रि से पहले यहां भक्ति के साथ शक्ति और गरबा के साथ आत्मरक्षा का संदेश देने की तैयारी चल रही है.
 

ये भी पढ़ें