एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल समेत एयर डिफेंस हथियार खरीदेगी सेना...क्या होती हैं Anti-Tank Guided Missile? कितनी बढ़ जाएगी सेना की ताकत, जानिए

भारत एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल हेलिना को चीन सीमा पर तैनात कर सकता है. एक बार अगर ये दुश्मन के टारगेट को लॉक कर लेती है तो फिर इसका निशाना चूकना असंभव है यानी दुश्मन को तहस-नहस करना है इसका लक्ष्य है. आर्मी और एयरफोर्ट ने पिछले साल इसके दो सफल परीक्षण किए थे.

हेलिना एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 11 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 12:43 PM IST

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 10 जनवरी को कुल 4,276 करोड़ रुपये के तीन पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों की आवश्यकता की स्वीकृति को मंजूरी दे दी है. बैठक के बाद रक्षा मंत्रालय (MoD) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि सभी तीन प्रस्ताव जिनमें से दो भारतीय सेना के लिए और एक भारतीय नौसेना के लिए है खरीद (Indian-IDDM)श्रेणी के अंतर्गत आते हैं. इसमें से 50 फीसदी उत्पादों को भारत में निर्मित होना जरूरी है.

DAC द्वारा अनुमोदित प्रस्तावों में से एक उन्नत हल्के हेलीकाप्टर (ALH) के साथ एकीकृत करने के लिए HELINA एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, लॉन्चर और संबंधित सहायक उपकरण की खरीद है. MoD का कहना है कि यह मिसाइल ALH के शस्त्रीकरण में एक आवश्यक घटक होगी और सेना की आक्रामक क्षमताओं को बढ़ाएगी. DAC द्वारा अनुमोदित एक अन्य प्रस्ताव VSHORAD (IR होमिंग) मिसाइल प्रणाली की खरीद है, जो वर्तमान में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा डिजाइन और विकास के अधीन है.

ब्रह्मोस लॉन्चर और फायर कंट्रोल सिस्टम की भी मंजूरी
उत्तरी सीमाओं के साथ हाल के विकास के साथ, प्रभावी और पोर्टेबल वायु रक्षा हथियार प्रणालियों की बढ़ती आवश्यकता है, जिन्हें बीहड़ इलाकों और समुद्री वातावरण में तेजी से तैनात किया जा सकता है. VSHORAD मिसाइल प्रणाली, एक मजबूत और शीघ्रता से तैनात करने योग्य प्रणाली के रूप में, भारत की वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगी.डीएसी ने भारतीय नौसेना के लिए शिवालिक वर्ग के जहाजों और अगली पीढ़ी के मिसाइल वेसल्स (एनजीएमवी) के लिए ब्रह्मोस लॉन्चर और फायर कंट्रोल सिस्टम (एफसीएस) की खरीद के लिए मंजूरी दे दी.बयान में कहा गया है कि इन प्रणालियों को शामिल करने से इन जहाजों की समुद्री हमले के संचालन और दुश्मन के जहाजों और व्यापारिक जहाजों को रोकने और नष्ट करने की क्षमता में वृद्धि होगी.

हेलिना की खूबियां
हेलिना को रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (DRDL), हैदराबाद द्वारा DRDO के मिसाइल और सामरिक प्रणाली क्लस्टर के तहत विकसित किया गया है.
इसकी अधिकतम सीमा सात किलोमीटर है और इस प्रणाली का प्रक्षेपण दिन और रात किसी भी समय किया जा सकता है
इसे एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (Advanced Light Helicopter-HAL) के हथियारयुक्त संस्करण के एकीकरण हेतु डिज़ाइन और विकसित किया गया है.
हेलिना दुनिया की सबसे उन्नत एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलों में से एक है. एक हेलिना मिसाइल का वजन 45 किलोग्राम के करीब है, इसकी लंबाई 6 फीट और व्यास 7.9 इंच है.
- हेलीकॉप्टर से लॉन्च की जाने वाली नाग मिसाइल की रेंज बढ़ाकर इसे ध्रुवास्त्र हेलिना नाम दिया गया है. 
- यह पारंपरिक कवच तथा विस्फोटक प्रतिक्रियाशील कवच के साथ युद्धक टैंक को भेदने में सक्षम है.
- इसे सेना एवं वायु सेना दोनों में हेलिकॉप्टरों के साथ एकीकरण के लिये विकसित किया गया है.
हेलिना डायरेक्ट हिट मोड और टॉप अटैक मोड दोनों को लक्ष्य कर सकती है.

वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइल (VSHORADS)
VSHORADS एक मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPAD) है. इसे DRDO के रिसर्च सेंटर इमरत (RCI), हैदराबाद ने अन्य DRDO प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग भागीदारों के सहयोग से डिजाइन और विकसित किया है.
यह मिसाइल कम दूरी पर कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों को बेअसर करने के लिए बनाई गई है.
इस मिसाइल और लॉन्चर को ऐसे डिजाइन किया गया है, ताकि इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सके. 

क्यों हैं ये जरूरी?
बख़्तरबंद और मशीनीकृत वाहनों की भूमिका आधुनिक समय के युद्ध में भी निर्णायक बनी हुई है क्योंकि उनकी पारंपरिक सुरक्षा से परे जाने की क्षमता है. टैंक की लड़ाई आम तौर पर पांच किलोमीटर के दायरे में लड़ी जाती है. इसका लक्ष्य स्पष्ट शॉट लेने से पहले दुश्मन के टैंक को मारना है. मिसाइल प्रणाली का विकास जो आधुनिक कवच का उपयोग करके निर्मित टैंकों को पराजित कर सकता है, दुश्मन के टैंकों को आगे बढ़ने से रोकने के रूप में कार्य करता है.

 

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