आजमगढ़ के गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र में सामने आए विवाद ने समाजवादी पार्टी की अंदरूनी राजनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. सपा विधायक नफीस अहमद के सामने ही उनके समर्थक और बूथ स्तर के पदाधिकारी के बीच मारपीट और विवाद का मामला सामने आने के बाद अब विपक्षी दलों को सपा पर हमला बोलने का मौका मिल गया है. भारतीय सुहेलदेव समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने इस पूरे विवाद पर तंज कसते हुए कहा कि सपा में जो कुछ चल रहा है, वह ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ जैसा है. राजभर के मुताबिक, पार्टी के लोग आपस में ही एक-दूसरे से भिड़ रहे हैं और इस लड़ाई की असली वजह ठेकेदारी और वर्चस्व की जंग है.
समाजवादी पार्टी के PDA पर भी साधा निशाना
राजभर यहीं नहीं रुके. उन्होंने समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के नारे पर भी निशाना साधा. सोशल मीडिया सर्वे और पसंद-नापसंद को लेकर कथित तौर पर कार्यकर्ता के साथ अभद्रता और मारपीट के आरोपों के बीच राजभर ने सवाल उठाया कि जो पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मान और PDA की राजनीति का दावा करती है, उसके भीतर ही कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं है. राजभर ने सपा के पुराने शासनकाल पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उस दौर में अपराध करने वाले लोगों को राजनीतिक संरक्षण मिला और यही वजह है कि आज भी कुछ लोग उसी मानसिकता के साथ व्यवहार कर रहे हैं. हालांकि, पीड़ित पक्ष की ओर से पुलिस को लिखित शिकायत और वीडियो सौंपे जाने के सवाल पर राजभर ने साफ कहा कि शिकायत के आधार पर निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी
एनडीए गठबंधन को मिलेगा फायदा
गोपालपुर के इस विवाद को आगामी चुनाव से भी जोड़ते हुए ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के भीतर मची आपसी खींचतान और गुटबाजी का पूरा फायदा एनडीए गठबंधन को मिलेगा.
राजभर ने इस दौरान सपा नेताओं पर ठेकेदारी में 35 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि जब पार्टी के लोग आपस में ही ठेकेदारी, कमीशन और वर्चस्व को लेकर एक-दूसरे की टांग खींचेंगे तो ऐसी स्थिति में पार्टी आगे कैसे बढ़ पाएगी.
सरकार ने नहीं की कोई मनमानी
आजमगढ़ की सियासत पर हमला बोलने के बाद ओमप्रकाश राजभर ने सहारनपुर में हुई कार्रवाई को लेकर भी विपक्ष को घेरा. कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से इस कार्रवाई को संविधान और न्यायपालिका पर हमला बताए जाने के आरोपों को राजभर ने सिरे से खारिज कर दिया. राजभर ने कहा कि सरकार ने कोई मनमानी नहीं की, बल्कि न्यायालय के आदेश का पालन किया है. उनके मुताबिक विपक्ष बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया को समझे केवल सरकार का विरोध करने के लिए बयानबाजी कर रहा है.
सिर्फ धार्मिक आधार पर कार्रवाई का आरोप लगाना सही नहीं
धर्म विशेष और खासकर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाए जाने के आरोपों पर भी राजभर ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि कार्रवाई सिर्फ किसी एक समुदाय के खिलाफ नहीं हो रही है. सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे या निर्माण के मामलों में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. राजभर ने कहा कि राजभर, चौहान, पटेल, यादव समेत अलग-अलग समुदायों के लोगों के मकानों और अवैध निर्माणों पर भी कार्रवाई हुई है. ऐसे में सिर्फ धार्मिक आधार पर कार्रवाई का आरोप लगाना सही नहीं है.
विपक्ष पर ‘विरोध का चश्मा’ पहनकर राजनीति करने का आरोप
मस्जिद और अन्य निर्माणों को बिना मौका दिए गिराने के विपक्ष के आरोप पर राजभर ने कहा कि न्यायालय की ओर से संबंधित पक्षों को नोटिस और कानूनी अवसर दिया गया था. लेकिन जब कार्रवाई हो गई तो अब विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है. राजभर ने विपक्ष पर ‘विरोध का चश्मा’ पहनकर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि किसी भी मामले में बयान देने से पहले अदालत की कार्रवाई और पूरी कानूनी प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए. कुल मिलाकर ओमप्रकाश राजभर ने एक ही प्रेस वार्ता में समाजवादी पार्टी की अंदरूनी कलह से लेकर PDA की राजनीति, ठेकेदारी में 35 फीसदी कमीशन के आरोप और सहारनपुर में हुई कार्रवाई तक विपक्ष को कई मोर्चों पर घेरने की कोशिश की है. अब गोपालपुर में सामने आए विवाद पर समाजवादी पार्टी क्या जवाब देती है, पीड़ित की शिकायत पर पुलिस क्या कार्रवाई करती है और सहारनपुर मामले में विपक्ष राजभर के इस पलटवार का कैसे जवाब देता है, इस पर सबकी नजर रहेगी.