मगरमच्छों के लगातार हमलों से परेशान बगहा के नौरंगिया थाना क्षेत्र के सिरिसिया गांव के ग्रामीणों ने सिस्टम का इंतजार करने के बजाय खुद ही समाधान निकाल लिया. भपसा नहर पार करना लोगों के लिए जानलेवा बन चुका था. ऐसे में ग्रामीणों ने एकजुट होकर चंदा इकट्ठा किया, श्रमदान किया और महज कुछ घंटों में चचरी पुल तैयार कर दिया. इस काम में वाल्मीकिनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा और स्थानीय समाजसेवी गुड्डू ठीकेदार ने भी आर्थिक सहयोग दिया.
गंडक का पानी बढ़ने से नहर में पहुंचे मगरमच्छ
लगातार हो रही बारिश के बाद गंडक नदी का पानी भपसा नहर और आसपास के जलमार्गों में पहुंच गया. इसके साथ ही कई मगरमच्छ भी नहर में आ गए, जिससे ग्रामीणों के लिए नहर पार करना खतरे से खाली नहीं रहा. हजारों किसानों की खेती नहर के दूसरी ओर है. धान की रोपाई और निराई-गुड़ाई के लिए किसानों को रोज कमर तक पानी में उतरकर नहर पार करनी पड़ रही थी.
किसान की मौत, महिला पर हमले के बाद बढ़ा आक्रोश
20 जुलाई को किसान केदार बैठा पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई. इसके बाद रविवार सुबह नहर पार कर रही एक महिला पर भी मगरमच्छ ने हमला कर दिया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई. लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से कई बार मदद की गुहार लगाई, लेकिन तत्काल कोई समाधान नहीं निकल सका.
विधायक के सहयोग से रातोंरात तैयार हुआ पुल
इसके बाद ग्रामीणों ने विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा से मुलाकात कर पुल निर्माण की मांग की. बरसात के मौसम में स्थायी पुल बनाना संभव नहीं था. ऐसे में विधायक ने फिलहाल चचरी पुल बनाने की सलाह दी और इसके लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई. ग्रामीणों ने भी चंदा जुटाया और रातभर श्रमदान कर अस्थायी चचरी पुल तैयार कर दिया, ताकि लोगों को पानी में उतरकर नहर पार न करनी पड़े.
किसानों की सुरक्षा को देखते हुए लिया गया फैसला
विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि लगातार मगरमच्छों के हमलों से लोगों की जान जोखिम में थी. स्थायी पुल बनने में समय लगेगा, इसलिए किसानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अस्थायी चचरी पुल बनाने में सहयोग किया गया, जिससे लोग सुरक्षित तरीके से आवाजाही कर सकें.
वन विभाग ने भी ग्रामीणों की पहल को सराहा
वीटीआर के मदनपुर वन क्षेत्र के रेंजर नसीम अहमद अंसारी ने बताया कि भपसा नहर तिरहुत कैनाल से जुड़ी है और बरसात के दौरान गंडक नदी से मगरमच्छ यहां पहुंच जाते हैं. उनकी संख्या का अनुमान लगाना मुश्किल है. किसान की मौत के बाद मगरमच्छ को पकड़ने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया गया था, लेकिन सफलता नहीं मिली. वन विभाग लगातार लोगों से नहर पार नहीं करने की अपील कर रहा है.
रेंजर ने ग्रामीणों द्वारा बनाए गए चचरी पुल को अच्छी पहल बताया. उन्होंने कहा कि मृत किसान के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा, जबकि घायल महिला को भी जांच के बाद उपचार के लिए सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी.
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