8 साल तक सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी, परीक्षा नहीं निकली तो बन गई नकली IAS अफसर, पकड़ी गई दो सगी बहनें

उत्तर प्रदेश के बरेली में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है. बरेली में बारादरी क्षेत्र की एक युवती ने खुद को गजरौला में एडीएम एफआर पद पर तैनात बताकर कई युवकों को अपने जाल में फंसाया और उनसे लाखों रुपये ऐंठ लिए.

Fake IAS Officers
gnttv.com
  • बरेली ,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:39 AM IST

कुछ समय पहले बॉलीवुड की मशहूर फिल्म स्पेशल 26 के नाम से रिलीज हुई थी. जिसमें दिखाया गया था कि किस प्रकार सीबीआई परीक्षा में असफल होने के बाद फर्जी तरीके से स्पेशल 26 सीबीआई ऑफिसर की टीम बनाई जाती है और शहर में जगह-जगह छापेमारी की जाती है. कहानी थोड़ी फिल्मी जरूर है लेकिन यह पूरी कहानी बरेली में देखने को मिली. जहां पर एक अभ्यर्थी जिसने कड़ी मेहनत कर अफसर बनने का सपना देखा और लगभग 8 साल तक पढ़ाई की. परीक्षा दी. लेकिन 8 साल तक वह सिविल सर्विस की परीक्षा को पास नहीं कर पाई और अधिकारी नहीं बन पाई तो उसने खुद ही अपनी गाड़ी पर एसडीएम लिखकर और खुद को एक अधिकारी पीसीएस बताकर लोगों पर अपना रुतबा बनाना शुरू कर दिया. यहां तक तो ठीक था लेकिन उसने अपनी बहन के साथ मिलकर भोले-भाले लोगों को यह भी बताना शुरू कर दिया कि वह उन लोगों की भी सरकारी नौकरी लगवा देगी. वह एक बड़ी अधिकारी है और फिर बरेली में कई लोगों के साथ धोखाधड़ी करना शुरू कर दिया. जिसके बाद बरेली पुलिस ने तीनों बहनों, आरोपी फर्जी आईएएस अधिकारी और उसकी सगी बहन सहित कजिन बहन को जेल भेज दिया है.

एडीएम, एफआर बनकर बनाया रुतबा
दरअसल, उत्तर प्रदेश के बरेली में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है. बरेली में बारादरी क्षेत्र की एक युवती ने खुद को गजरौला में एडीएम एफआर पद पर तैनात बताकर कई युवकों को अपने जाल में फंसाया और उनसे लाखों रुपये ऐंठ लिए. जब सच्चाई खुली तो पीड़ितों के पैरों तले जमीन खिसक गई. इसके बाद लोगों ने इस मामले की शिकायत बरेली पुलिस से की. पुलिस ने जांच पड़ताल कर महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया. इस मामले में जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई थी कि मामले में दो सगी बहनों सहित 3 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है. यह दो महिलाएं फर्जी अधिकारी बनकर लोगों से नौकरी के नाम पर रुपए ठग रही थीं. पुलिस ने इन आरोपियों के पास से एक एडीएम लिखी हुई सफेद रंग की लग्जरी गाड़ी. 10 से अधिक चेक बुक. दो लैपटॉप मोबाइल फोन और अलग-अलग खातों में 50 लाख रुपए की धनराशि भी बरामद की है. जिनको नियमों के तहत फ्रीज कर दिया गया है. इसके अलावा उनके पास से 4 लाख की धनराशि भी बरामद हुई है. मामले में जानकारी देते हुए सी ओ पंकज श्रीवास्तव ने बताया की जानकारी मिलने पर मुकदमा दर्ज किया गया है मुख्य आरोपी विप्रा शर्मा. और उनकी दो बहन दीक्षा पाठक और शिखा शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है. यह तीनों कूट रचित तरीके से दस्तावेज बनाकर के लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करते थे. जैसे-जैसे मामले की जांच हो रही है अन्य चीजें प्रकाश में आ रही हैं.

एडीएम एफ आर बन कर धोखाधड़ी
बरेली मे बारादरी के ग्रीन पार्क निवासी विप्रा मिश्रा ने खुद को गजरौला में एडीएम एफआर पद पर तैनात बताकर लोगों से संपर्क बढ़ाती थी. बड़ी ही चालाकी से वह पहले दोस्ती करती. फिर सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर देती. उसकी बातों में आकर कई युवक फंस गए और मोटी रकम देने लगे. लोगों को लगा यह सरकारी नौकरी लगवा देगी जिंदगी को आसान बना देगी. आगे पुलिस का कहना है कि इन आरोपियों ने लोगों को यह दिखाने के लिए कि उनके जॉइनिंग लेटर लखनऊ से आ रहे हैं. इसके लिए वकायदा लखनऊ के सरकारी दफ्तर के नजदीकी भारतीय पोस्ट ऑफिस से ही कोरियर किया जाता था और जरूरी दिशा निर्देश भी लिखित रूप से सरकारी विभाग के नाम से कोरियर किए जाते थे. जिससे लोगों को एहसास हो जाता था कि उनका जो दिशा निर्देश और नियुक्ति पत्र मिला है वह सीधे तौर पर सरकार की ओर से लखनऊ से ही भेजा जा रहा है. आगे पुलिस ने बताया कि एक अभ्यर्थी को उनके द्वारा 17000 कुछ रुपए वेतन के रूप में भी अकाउंट में ट्रांसफर किए गए जिससे उस व्यक्ति को लगा की सरकार की ओर से अब सैलरी भी मिलने लगी है.

कंप्यूटर ऑपरेटर से ठगे 5 लाख
इस पूरे मामले में पूछताछ करते हुए पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की तो पता चला कि किला थाना क्षेत्र मलुकपुर निवासी मुसाहिद पुत्र मुजाहिद से युवती ने उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया. और कहां की जल्दी सरकारी नौकरी लगवा देगी. इस झांसे में आकर उन्होंने अलग-अलग किस्तों में 5 लाख 21 हजार रुपये दे दिए. लंबे समय तक नौकरी न मिलने पर जब शक हुआ तो सच्चाई सामने आई और ठगी का खुलासा हो गया. बताया जा रहा है कि उसकी बहन शिखा भी इसी तरह लोगों को फंसाकर रुपये ऐंठने का काम करती है. दोनों बहनों ने मिलकर कई लोगों को निशाना बनाया है.

2012 से 2020 तक की थी सिविल सर्विस की तैयारी
इस पूरे मामले में खुलासा करते हुए एएसपी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि यह पहले सिविल सर्विस की तैयारी कर चुकी है अपनी बहनों के साथ मिलकर इन्होंने यह प्लान बनाया था. आगे उन्होंने बताया कि थाना बारादरी में धोखाधड़ी की सूचना प्राप्त हुई है. सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है. विवेचना के आधार पर धारा लगाई गई है दो आरोपी विप्रा शर्मा. और शिखा पाठक इसके अलावा दिक्षा पाठक का भी नाम सामने आया है. इनको माननीय न्यायालय के समस्त पेश किया गया है विप्रा शर्मा की इसमें मुख्य भूमिका है. यह खुद को पीसीएस और आईएएस अधिकारी के रूप में बताती हैं. उन्होंने रोहिलखंड यूनिवर्सिटी से इतिहास और अंग्रेजी में डबल एम.ए किया हुआ है. यह अपने को डॉक्टर भी बताती है कि इन्होंने आगरा से पीएचडी की डिग्री हासिल की है इस संबंध में उनके द्वारा अभी कोई डिग्री प्रस्तुत नहीं की गई है वर्ष 2012 से 2020 तक इनके द्वारा यूपीएससी की परीक्षाओं की तैयारी भी की गई है और इसी क्रम में 2020 में अटैंप खत्म हो जाता है. इसके बाद उन्होंने पहले अपने आप को एसडीएम के रूप में प्रोजेक्ट किया और उसके बाद उन्होंने एडीएम के रूप में प्रोजेक्ट किया. उनके पास से एक गाड़ी एसयूबी सफेद गाड़ी बरामद हुई है जिसके ऊपर एसडीएम लिखा हुआ है.

रिपोर्टर: कृष्ण गोपाल राज

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