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Bettiah Farmer Dragon Fruit Cultivation: पारंपरिक खेती छोड़ बेतिया के किसान ने लगाया ड्रैगन फ्रूट, 1 बिघा में कर रहे खेती, लाखों रुपए में हो सकती है आमदनी

बिहार के बेतिया स्थित नौतन प्रखंड के किसान मंजय प्रसाद ने पारंपरिक खेती छोड़ एक बीघे में ड्रैगन फ्रूट उगाकर मिसाल पेश की है. 200 से 250 रुपये प्रति किलो बिकने वाले इस फल से उन्हें बंपर कमाई की उम्मीद है.

Dragon Fruit Cultivation
अभिषेक पाण्डेय
  • बगहा,
  • 23 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:04 PM IST

बेतिया में एक किसान ने पारंपरिक खेती से अलग हटकर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है. नौतन प्रखंड के बैकुंठवा पंचायत स्थित जयनगर गांव के वार्ड नंबर 16 निवासी किसान मंजय प्रसाद करीब एक बीघा जमीन में इसकी खेती कर रहे हैं. पिछले दो वर्षों से ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे मंजय प्रसाद को इससे अच्छी आमदनी की उम्मीद है.

पारंपरिक खेती से अलग चुना नया रास्ता
मंजय प्रसाद ने खेती के लिए कुछ अलग करने का फैसला लिया और ड्रैगन फ्रूट को अपने खेत में उतारा. करीब एक बीघा जमीन में शुरू की गई इस खेती से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है. किसान का कहना है कि इस फसल की देखभाल में समय और मेहनत जरूर लगती है, लेकिन इसके जरिए पारंपरिक फसलों के मुकाबले बेहतर आमदनी की उम्मीद है.

कुशीनगर और बंगाल से लाए बीज
किसान ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करने के लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और बंगाल से बीज मंगाए थे. इन्हीं बीजों से उन्होंने अपने खेत में इसकी खेती शुरू की. मंजय प्रसाद के मुताबिक, ड्रैगन फ्रूट के पौधे करीब 18 महीने में फल देने के लिए तैयार हो जाते हैं. इसके बाद पौधों की नियमित देखभाल और सही प्रबंधन के जरिए उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है.

बाजार में 200 से 250 रुपये किलो तक कीमत
मंजय प्रसाद के मुताबिक ड्रैगन फ्रूट की बाजार में अच्छी मांग है. फिलहाल इसकी कीमत करीब 200 से 250 रुपये प्रति किलो तक बताई जा रही है. इसी वजह से किसान को अपनी फसल से अच्छी आमदनी की उम्मीद है. उनका कहना है कि कम जमीन में भी ड्रैगन फ्रूट की खेती करके बेहतर कमाई की संभावना रहती है. हालांकि, फसल तैयार करने के लिए लगातार समय और मेहनत देनी पड़ती है.

आसपास के किसानों में भी बढ़ रही दिलचस्पी
ड्रैगन फ्रूट की खेती से जुड़े अपने अनुभव के बाद मंजय प्रसाद को उम्मीद है कि इससे अच्छी आमदनी हो सकती है. वहीं, आसपास के दूसरे किसानों में भी इस खेती को लेकर रुचि बढ़ रही है. पारंपरिक फसलों से अलग खेती का यह तरीका अब स्थानीय स्तर पर किसानों का ध्यान खींच रहा है. मंजय प्रसाद पिछले दो वर्षों से इस फसल पर काम कर रहे हैं और आने वाले समय में बेहतर उत्पादन की उम्मीद लगाए हुए हैं.

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