बिहार में बाढ़ का असर अब निर्माणाधीन बख्तियारपुर-ताजपुर फोरलेन पर भी दिखाई देने लगा है. गंगा नदी के तेज बहाव के कारण समस्तीपुर जिले के मोहनपुर प्रखंड के डुमरी गांव के पास पुल संख्या 11 का एप्रोच पथ करीब 40 फीट तक धंस गया है. तीन जगहों पर कटाव होने से सड़क का हिस्सा बाढ़ के पानी में बह गया. घटना की जानकारी मिलते ही निर्माण कंपनी में हड़कंप मच गया और अभियंताओं की टीम मजदूरों के साथ मौके पर पहुंचकर मरम्मत और बचाव कार्य में जुट गई है.
तेज बहाव से तीन जगहों पर हुआ कटाव
गंगा नदी में आई बाढ़ के पानी का बहाव काफी तेज है. इसी वजह से डुमरी गांव के पास निर्माणाधीन पुल के एप्रोच पथ को नुकसान पहुंचा है. करीब 40 फीट तक सड़क धंसने के बाद आसपास के लोगों में भी चिंता बढ़ गई. बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाने लगे.
पुल के एप्रोच पथ पर नई मिट्टी डाली गई थी. गंगा के बाढ़ के पानी का तेज बहाव होने के कारण मिट्टी धंस गई. स्थिति को संभालने के लिए रिंग बांध बनाया जा रहा है, ताकि बाढ़ का पानी पुल तक न पहुंच सके. कंपनी की टीम कटाव रोकने और एप्रोच पथ को सुरक्षित करने में जुटी हुई है.
नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट है फोरलेन
बख्तियारपुर-ताजपुर फोरलेन परियोजना को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है. वर्ष 2011 में इसका शिलान्यास किया गया था. परियोजना का उद्देश्य मगध और मिथिलांचल के बीच सीधा संपर्क बढ़ाना और सफर का समय कम करना था. नीतीश कुमार कई बार निर्माण कार्य का जायजा भी ले चुके हैं, लेकिन करीब 15 साल बीतने के बावजूद परियोजना अब तक पूरी नहीं हो सकी है.
इस फोरलेन की लंबाई करीब 51.26 किलोमीटर है, जबकि गंगा नदी पर बनने वाले पुल की लंबाई करीब 5.51 किलोमीटर है. परियोजना पूरी होने के बाद बख्तियारपुर से ताजपुर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और दरभंगा के बीच आवागमन आसान होगा. साथ ही गांधी सेतु और राजेंद्र पुल पर वाहनों का दबाव कम होने से जाम की समस्या में भी राहत मिलने की उम्मीद है.
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