बिहार के कटिहार जिले में बाढ़ ने कई इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. ऐसी-ऐसी तस्वीरें आ रही हैं जो आपके दिल को पिघला देगी. कुरसेला प्रखंड के दक्षिणी मुरादपुर पंचायत के कई गांव जलमग्न हो चुके हैं. बाढ़ की वजह से सैकड़ों परिवार घर छोड़कर कुरसेला रेलवे स्टेशन के माल गोदाम परिसर में प्लास्टिक का तंबू लगाकर रहने को मजबूर हैं. इसी बीच यहां से सामने आई एक तस्वीर में लोगों की बेबसी को साफ देखा जा सकता है.
रेलवे स्टेशन परिसर में बना आशियाना
कटिहार जिले के कई प्रखंड बाढ़ की चपेट में हैं और लाखों की आबादी प्रभावित बताई जा रही है. कुरसेला प्रखंड के दक्षिणी मुरादपुर पंचायत के कई गांव पानी में डूबे हुए हैं और हालात गंभीर बने हुए हैं. ऐसे में डूबे गांवों के सैकड़ों बाढ़ पीड़ित कुरसेला रेलवे स्टेशन के माल गोदाम परिसर में प्लास्टिक का तंबू लगाकर किसी तरह जिंदगी गुजार रहे हैं. बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने के लिए सत्तापक्ष जेडीयू की महिला नेत्री और बांसगढ़ा पंचायत, कोढ़ा की मुखिया प्रीतम कुशवाहा वहां पहुंची थीं. वह अपने साथ निजी तौर पर मदद के लिए सूखा राशन, मुढ़ी और मिक्चर के पैकेट लेकर आई थीं.
जैसे ही उनकी कार की पिछली डिक्की खोली गई, बाढ़ पीड़ितों की भीड़ वहां जमा हो गई. राशन बांटने का काम शुरू होता, उससे पहले ही लोग मुढ़ी और मिक्चर के पैकेट लेने के लिए खुद ही टूट पड़े. देखते ही देखते गाड़ी में रखा सूखा राशन लोगों के बीच बंटने लगा.
तस्वीर में साफ दिखी भूख की बेबसी
मौके की तस्वीरों में बाढ़ पीड़ितों के हाथों में पॉलीथिन में भरे मुढ़ी और मिक्चर के पैकेट दिखाई दे रहे हैं. वहीं एक बुजुर्ग महिला को जब सूखा राशन नहीं मिला तो वह भी मुढ़ी और मिक्चर का पैकेट मांगती नजर आईं. महिला की हालत में भूख और बेबसी साफ दिखाई दे रही थी. जनप्रतिनिधि के साथ आई महिला नेत्री ने उस बुजुर्ग महिला के पास जाकर उन्हें भी सूखा राशन देने का भरोसा दिलाया.
200 से ज्यादा परिवार रह रहे
मौके पर मौजूद जेडीयू नेत्री ने बताया कि वह अपने निजी कोष से बाढ़ पीड़ितों के बीच सूखा राशन बांटने के लिए लाई थीं. उन्हें अंदाजा नहीं था कि यहां इतनी बड़ी संख्या में लोग भूखे हैं. राशन कम पड़ गया और लोगों ने खुद ही उसे लेना शुरू कर दिया. उन्होंने बताया कि यहां 200 से अधिक परिवार रह रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि ये लोग कई दिनों से भूखे हैं. बाढ़ पीड़ितों की हालत देखकर उन्हें दया आ गई. बाढ़ ने इन परिवारों से उनका घर और सामान्य जिंदगी दोनों छीन ली है. अब ये लोग खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक टांगकर रहने को मजबूर हैं. भूखे-प्यासे बाढ़ पीड़ितों की यह तस्वीर उनकी बेबसी और मुश्किल हालात को साफ तौर पर सामने रख रही है.
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