बिहार देश का पहला राज्य बन गया है जिसने सभी विकास कार्यों के ठेके एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘बिहार वन’ के माध्यम से देने की दिशा में कदम बढ़ाया है. इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी नोएडा की नामी आईटी कंपनी कॉरपोरेट इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड (CIPL) को सौंपी गई है. पटना स्थित बेल्ट्रॉन भवन में बिहार सरकार और CIPL के बीच MoU पर हस्ताक्षर हुए, जिसके साथ परियोजना को औपचारिक रूप से गति मिल गई.
87 करोड़ रुपये की ई-गवर्नेंस परियोजना
CIPL ने 87 करोड़ रुपये मूल्य का यह प्रोजेक्ट हासिल किया है. बिहार सरकार ने इसे ई-गवर्नेंस और डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण छलांग बताया है. जुलाई 2026 को 'बिहार-वन' के गो-लाइव होने की समयसीमा तय की गई है. सरकार का स्पष्ट मानना है कि यह केवल एक तकनीकी पहल नहीं, बल्कि प्रशासन को अधिक पारदर्शी, सरल और नागरिक-केंद्रित बनाने का दूरदर्शी कदम है.
इतिहास, विरासत और तकनीक का संगम
ज्ञान और संस्कृति की समृद्ध परंपरा वाला बिहार अब डिजिटल भारत के मानचित्र पर भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है. 'बिहार-वन' इसी परिवर्तन का प्रतीक है. इंडियन एआई समिट में हुए समझौते के बाद जिस तेजी से इस प्रोजेक्ट पर कार्य आगे बढ़ा, वह दर्शाता है कि यह पहल सिर्फ घोषणा नहीं, बल्कि जमीन पर उतरने वाली वास्तविक योजना है. पटना में स्थापित आधुनिक डेवलपमेंट सेंटर इस परिवर्तन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और शहर को पूर्वी भारत के उभरते तकनीकी हब के रूप में पहचान दिला रहा है.
नागरिकों को एक ही मंच पर तेज और पारदर्शी सेवाएं
'बिहार-वन' का सबसे बड़ा लाभ यह है कि लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने या लंबी कतारों में खड़े रहने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी. एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिकों को अनेक सरकारी सेवाएं एक ही स्थान पर, तेज और आसान तरीके से प्रदान करेगा.
योजनाओं के लिए लोग घर से ही आवेदन कर सकेंगे
छात्र बिना देरी के आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त कर पाएंगे. परिवार समय पर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे. बिहार कॉमन सोशल रजिस्ट्री के साथ एकीकरण यह सुनिश्चित करेगा कि नागरिकों को बार-बार अपनी जानकारी दोहरानी न पड़े. साथ ही, स्थानीय भाषा पर आधारित चैटबोट सेवा लोगों को निर्देश और सहायता पाने में और अधिक सुविधा देगी.
बिहार सरकार और CIPL इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं. आधुनिक डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना न केवल तकनीकी उत्पादन को बढ़ा रही है, बल्कि पटना को नवाचार और डिजिटल समाधान के एक नए केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है.
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