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दीपावली की सफाई में मिले उल्लू के 6 बच्चे, रोज खाते हैं 1 किलो चिकन, अंधेरा होते ही दिखाते हैं अपना अनोखा अंदाज

दीपावली की सफाई के दौरान एक घर के झरोखे से मिले इन नन्हे मेहमानों की अब वन विभाग देखभाल कर रहा है. इनके खाने-पीने का खास इंतजाम किया गया है.

वन विभाग के मेहमान बने उल्लू के 6 बच्चे
ऋतिक राजपूत
  • बिजनौर ,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:48 AM IST

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में उल्लू के छह बच्चों की कहानी इन दिनों काफी दिलचस्प है। दीपावली की सफाई के दौरान एक घर के झरोखे से मिले इन नन्हे मेहमानों की अब वन विभाग देखभाल कर रहा है. इनके खाने-पीने का खास इंतजाम किया गया है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन बच्चों के सामने शाम को चिकन रखा जाता है, लेकिन ये खाना शुरू करते हैं अंधेरा होने के बाद. शुरुआत में आधा किलो चिकन दिया गया था, जिसे सभी बच्चों ने मिलकर चट कर दिया. इसके बाद इनकी खुराक बढ़ाकर रोजाना एक किलो चिकन कर दी गई.

दीपावली की सफाई करते समय घर में दिखे उल्लू के छह बच्चे
यह मामला बिजनौर की कृष्ण विहार कॉलोनी का है. यहां जगदीश कुमार के घर में दीपावली की सफाई चल रही थी. इसी दौरान उन्हें मकान के एक झरोखे में उल्लू के छह बच्चे दिखाई दिए. अचानक घर में इतने सारे नन्हे पक्षियों को देखकर उन्होंने उनकी सुरक्षा के लिए वन विभाग को सूचना दी. बताया गया कि मकान के झरोखे में जाली लगा दी गई थी. इसके बाद उल्लू की मां अपने बच्चों को छोड़कर चली गई थी. ऐसे में इन बच्चों की देखभाल करना जरूरी हो गया था. जगदीश कुमार ने बिना देर किए सभी छह बच्चों को वन विभाग की टीम के हवाले कर दिया, ताकि उनकी उचित देखभाल हो सके.

वन विभाग के रेंज कार्यालय में चल रही परवरिश
घर से मिलने के बाद उल्लू के सभी छह बच्चों को वन विभाग के रेंज कार्यालय लाया गया. यहां उन्हें दो पिंजरों में रखा गया है. वन विभाग की टीम उनके खाने-पीने का ध्यान रख रही है, ताकि वे स्वस्थ रहें और बड़े होकर अपने प्राकृतिक वातावरण में लौट सकें. ये सभी बच्चे बार्न प्रजाति के उल्लू बताए जा रहे हैं. फिलहाल इनकी परवरिश वन विभाग की देखरेख में हो रही है. जब ये उड़ने और अपने दम पर रहने के लायक हो जाएंगे, तब इन्हें प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया जाएगा.

पहले आधा किलो चिकन दिया, अगले दिन से एक किलो की दावत
इन छह बच्चों की भूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले दिन इन्हें आधा किलो चिकन दिया गया था. सभी बच्चों ने मिलकर पूरा चिकन खा लिया. इसके बाद अगले दिन से इनके लिए रोजाना एक किलो चिकन का इंतजाम किया जाने लगा. चिकन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर इनके सामने रखा जाता है. छहों बच्चे मिलकर इस भोजन को खाते हैं. इस तरह दीपावली की सफाई के दौरान मिले ये नन्हे पक्षी अब वन विभाग की देखरेख में रोजाना चिकन खाकर बड़े हो रहे हैं.

दिन में शांत रहते हैं, अंधेरा होते ही शुरू होती है हलचल
इन उल्लू के बच्चों की दिनचर्या भी काफी दिलचस्प है. वन विभाग की ओर से इनके सामने शाम को ही चिकन रख दिया जाता है, लेकिन ये तुरंत खाना शुरू नहीं करते. अंधेरा होने के बाद ही इनकी गतिविधियां बढ़ती हैं और फिर ये अपना भोजन खाते हैं. दरअसल, उल्लू रात में सक्रिय रहने वाला पक्षी है. दिन के समय यह आमतौर पर आराम करता है और रात में भोजन की तलाश में निकलता है. इन बच्चों का रात में खाना शुरू करना भी इसी प्राकृतिक आदत का हिस्सा है.

उड़ने लायक होते ही प्रकृति में लौटेंगे छहों बच्चे
फिलहाल बिजनौर के वन विभाग कार्यालय में इन छह बच्चों की देखभाल की जा रही है. उनकी खुराक से लेकर उनकी सुरक्षा तक का ध्यान रखा जा रहा है. इनकी परवरिश का मकसद इन्हें इतना सक्षम बनाना है कि ये आगे चलकर अपने प्राकृतिक वातावरण में रह सकें. दीपावली की सफाई के दौरान एक घर के झरोखे से शुरू हुई यह कहानी अब वन विभाग की देखरेख तक पहुंच गई है. छहों नन्हे उल्लू फिलहाल सुरक्षित हैं और उनके बड़े होने का इंतजार किया जा रहा है. उड़ने लायक होने के बाद उन्हें खुले प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया जाएगा, जहां वे अपनी स्वाभाविक जिंदगी जी सकेंगे.

बिजनौर DFO ने आजतक को क्या बताया?
जब इस पूरे मामले को लेकर आज तक ने बिजनौर DFO (जय सिंह कुशवाहा) से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि, यह मामला उनके संज्ञान में है हमारी टीम ने उल्लुओं का रेस्क्यू किया था, उल्लू काफी दिनों से हमारी देखरेख में ही है, उल्लू के बच्चे अभी काफी छोटे हैं, जैसे ही यह बड़े होंगे तभी वन विभाग इनको छोड़ देगा.

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