बीजेपी आलाकमान ने नितिन नबीन को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का बड़ा फैसला केवल संगठनात्मक स्तर पर नहीं लिया है, बल्कि देश की राजनीति को भी एक स्पष्ट संदेश दिया है. संदेश यह है कि बीजेपी में नेतृत्व का रास्ता उम्र या वंश नहीं, बल्कि मेहनत, ऊर्जा और संगठनात्मक क्षमता से तय होता है. महज 45 वर्ष की उम्र में नितिन नबीन को यह जिम्मेदारी देकर पार्टी ने यह साबित कर दिया है कि भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए युवा नेतृत्व तैयार करती है. जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस की कमान 83 वर्ष के मलिकार्जुन खड़गे के बुजुर्ग कंधों पर है.
बीजेपी में पीढ़ीगत बदलाव की शृंखला का भी प्रतीक
बीजेपी में नितिन नाबिन का अध्यक्ष बनने का फैसला एक नियुक्ति नहीं, बल्कि बीजेपी में पीढ़ीगत बदलाव की शृंखला का प्रतीक भी है. 1980 में स्थापना के बाद पहले अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनहोर जोशी और कुशाभाऊ ठाकरे जैसे नेताओं के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी वैचारिक और सांगठनिक नींव मजबूत की. उनके बाद नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, वैंकया नायडू,अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, नितिन गड़करी, जेपी नड्डा, अमित शाह जैसी दूसरी पीढ़ी ने धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव, देवेंद्र फड़नवीस, योगी आदित्यनाथ, प्रहलाद जोशी और अनुराग ठाकुर जैसे तीसरी पीढ़ी के साथ मिलकर पार्टी में संगठनात्मक विस्तार कर सत्ता तक पहुंचाया. अब चौथी पीढ़ी के रूप में युवा नितिन नबीन की ताजपोशी के साथ बीजेपी औपचारिक रूप से नेतृत्व की कमान सौंप दी.
पार्टी में उम्र बाधा नहीं
नितिन नबीन बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे. इससे पहले यह रिकॉर्ड अमित शाह के नाम था, जिन्होंने 49 वर्ष की उम्र में पार्टी की कमान संभाली थी. उनसे पहले नितिन गडकरी 52 वर्ष की उम्र में अध्यक्ष बने थे. ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी भारतीय जनसंघ के दौर में कम उम्र में अध्यक्ष बने थे. इस फैसले के जरिए बीजेपी ने युवाओं को सीधा संदेश दिया है कि पार्टी में उम्र बाधा नहीं है. बल्कि सामाजिक दृष्टि देखें तो नितिन कायस्थ समुदाय से आते हैं, जिसकी संख्या चुनावी राजनीति में निर्णायक नहीं मानी जाती. इसके बावजूद उन्हें पार्टी का शीर्ष पद सौंपना यह दर्शाता है कि बीजेपी नेतृत्व चयन में जातिगत गणित से ऊपर उठकर संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक समझ को प्राथमिकता दे रही है. संगठन में काम करने वाला, जमीन से जुड़ा और चुनावी चुनौतियों को समझने वाला कार्यकर्ता शीर्ष तक पहुंच सकता है.
नितिन नबीन का चयन क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से अहम
नितिन नबीन का चयन क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी बेहद अहम है. वे बिहार से आते हैं और पूर्वी भारत से बीजेपी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं. मतलब साफ है कि पार्टी का फोकस केवल हिंदी पट्टी या पश्चिमी भारत तक सीमित नहीं है. बिहार, बंगाल, ओडिशा, असम और उत्तर-पूर्व जैसे राज्यों में बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है और नितिन नबीन का नेतृत्व सौप कर पार्टी की इस रणनीति को मजबूती प्रदान करना चाहती है.
नबीन अनुभव के मामले में किसी से कम नहीं
हालांकि उम्र में युवा होने के बावजूद नितिन नबीन अनुभव के मामले में किसी से कम नहीं हैं. उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2006 में हुई, जब वे पटना पश्चिम विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने. तब से वे लगातार पांच बार इस सीट से जीत हासिल कर चुके हैं. राज्य सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने पथ निर्माण, नगर विकास एवं आवास और विधि जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभालने के साथ-साथ संगठन में भी उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा में राष्ट्रीय महासचिव और बिहार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में काम करने के बाद उन्होंने कई राज्यों में संगठन प्रभारी की भूमिका निभाई सिक्किम और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संगठन प्रभारी के साथ-साथ चुनावी रणनीति तैयार करने में उनकी भूमिका को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने गंभीरता से नोटिस लिया.
पीएम मोदी ने किया था वादा
पीएम मोदी ने लाल किले प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा था एक लाख नए युवाओं को देश की राजनीति में लाने वादा किया था. दूसरी तरफ आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत समेत संघ पदाधिकारों ने युवाओ को नेतृत्व देने की बात सार्वजनिक मंच कई बार कहीं नितिन नबीन को पार्टी अध्यक्ष बनाना उसका संदेश ही हैं. भले ही नितिन नबीन का अध्यक्षीय कार्यकाल 3 साल का है जो जनवरी 2029 में पूरा होगा लेकिन इतना तो है तय 2029 का लोकसभा चुनाव उनके नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा. क्योंकि उनसे पहले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर पार्टी ने अमित शाह और जेपी नड्डा को अध्यक्ष कार्यकाल को विस्तार दिया था.
यही वजह है उनकी टीम में युवाओं और अनुभवी नेताओं का संतुलन बनाए जाने की बात कही जा रही है. पार्टी संगठन में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का प्रावधान है और नई टीम में महिलाओं और युवा चेहरों को आगे लाने की तैयारी है. नितिन नबीन के भारतीय युवा मोर्चा कई समक्ष सहयोगी राज्यों में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, जेपी नड्डा की राष्ट्रीय टीम में, प्रदेश अध्यक्ष, केंद्र सरकार और राज्य सरकारों में मंत्री, सांसदों, विधायकों के रूप में विराजमान हैं. शायद यही वजह कि पार्टी और संघ कार्यकर्ताओं को ये संदेश देना चाहते हों आप संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की सोचिए, आपके पद और जिम्मेदारी की हम सोचेंगे आप निश्चिंत रहिए.
(हिमांशु मिश्रा की रिपोर्ट)