भारत की मेजबानी में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) की बैठक शनिवार से नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हो गई है. दो दिनों तक यह सम्मेलन चलेगा. पीएम नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन से लेकर तमाम विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का गर्मजोशी से स्वागत किया. पीएम मोदी ने ब्रिक्स के मंच से यूएनएससी में सुधार से लेकर ग्लोबल रिफॉर्म तक पर अपनी बात रखी.
यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार की मांग
पीएम मोदी ने ब्रिक्स के मंच से यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार की मांग की है. उन्होंने कहा की हमें ग्लोबल रिफार्म के लिए प्रपोजल तैयार करना चाहिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें अगले 20 सालों के लिए एक नए और बड़े लक्ष्य वाले एजेंडे पर काम करने की जरूरत है.पीएम मोदी ने कहा, मैं प्रस्ताव रखता हूं कि हम मिलकर ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म के 10 प्रपोजल तैयार करें, जिसे हम अगली समिट तक एक ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप का रूप कर सकते हैं. इस रोडमैप को बनाने में हमें तीन मुख्य पहलुओं- रिप्रेजेटेंशन, रिस्पॉन्सिवनेस और रूल मेकिंग का ध्यान रखना होगा. पहला- रिप्रेजेंटेशन में यूएनएससी में सुधार अब टाला नहीं जा सकता. टैक्स बेस्ड नेगोशिएशन से हमें इस जोड़ना होगा. वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर, इकोनॉमिक नीति आज की असलियत के आधार पर होनी चाहिए. जो देश ग्लोबल इकोनॉमिक को गति देते हैं उन्हें उचित भूमिका मिलनी चाहिए.
ग्लोबल रिफॉर्म की दिशा भी करनी होगी तय
पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स को मजबूत करते हुए हमें ग्लोबल रिफॉर्म की दिशा भी तय करनी होगी. ग्लोबल गवर्नेंस का वर्तमान स्ट्रक्चर एक पिरामिड जैसा दिखाई देताहै. इसके ऊपरी भाग में पावर और जिसीजन मेकिंग केंद्रित है. और नीचे वह देश स्थित हैं, जो इन फैसलों से प्रभावित तो होते हैं, लेकिन अपने आकार की वजह से फैसलों में शामिल नहीं हो पाते.
वैश्विक संस्थाएं समस्याओं का तेजी से और प्रभावी समाधान दें
पीएम मोदी ने कहा कि फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस में वोटिंग पावर, नेतृत्व की भूमिका और पॉलिसी प्रायोरिटीज आज की आर्थिक हकीकत के हिसाब से होनी चाहिए. जो देश ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ को गति देते हैं, उन्हें वैश्विक आर्थिक गवर्नेंस को दिशा देने में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए. उन्होंने रिस्पॉन्सिवनेस पर कहा कि वैश्विक संस्थानों में लोगों का भरोसा तभी बनेगा, जब वे समस्याओं का प्रभावी समाधान कर पाएंगे. सामूहिक प्रतिक्रिया की स्पीड, स्केल और लास्ट माइल इम्पैक्ट पर ध्यान देना होगा. पीएम मोदी ने सी फेयरर्स के लिए इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क बनाने का भी प्रस्ताव रखा, जिसमें मैरिटाइम अथॉरिटीज और मिशंस को जोड़कर डिस्ट्रेस अलर्ट, मेडिकल असिस्टेंस, परिवारों को सूचना और इवैक्युएशन में मदद दी जा सके.
ब्रिक्स के 20 साल के सफर की तुलना इंसानी जीवन से की
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान नए विचारों, आपसी सहयोग और टिकाऊ विकास को प्राथमिकता दी है. इन मुद्दों के जरिए ब्रिक्स के कामकाज को आम लोगों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया. उन्होंने बताया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान 30 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें हुईं. पीएम मोदी ने ब्रिक्स देशों की टीमों और प्रतिनिधियों के सहयोग के लिए उनका आभार भी जताया. उन्होंने कहा कि इस साल का सम्मेलन इसलिए भी खास है, क्योंकि ब्रिक्स अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है. मोदी ने ब्रिक्स के 20 साल के सफर की तुलना इंसानी जीवन से करते हुए कहा कि 20 साल की उम्र में जिम्मेदारियां और क्षमता दोनों नई दिशा लेते हैं. अब ब्रिक्स भी अपने परिपक्वता के दौर में पहुंच गया है.