वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लगातार 9वीं बार केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं. सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए 6.8% से 7.2% तक आर्थिक वृद्धि का अनुमान जताया है. मजबूत होती घरेलू मांग के बीच हर वर्ग की नजर इस बात पर है कि क्या बजट 2026 में कोई बड़ा बदलाव होगा.
बायोफार्मा सेक्टर पर बड़ा दांव
सरकार ने दवाइयों को किफायती बनाने और भारत को ग्लोबल फार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने के लिए बड़ा ऐलान किया है. 'बायोफार्मा शक्ति' योजना के तहत अगले पांच सालों में 10 हजार करोड़ रुपए निवेश का प्रस्ताव रखा गया है.
बीमारियों से निपटने के लिए 'बायोफार्मा शक्ति' योजना
इस योजना का मकसद भारत में तेजी से बढ़ रहे डायबिटीज, कैंसर और ऑटोइम्यून जैसी गंभीर बीमारियों के बढ़ते दबाव से प्रभावी ढंग से मुकाबला करना है. इसके तहत बायोलॉजिक्स के निर्माण के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा और देश में अत्याधुनिक दवा उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा. साथ ही, सरकार तीन नए फार्मा संस्थान स्थापित करेगी, जिससे रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग दोनों क्षेत्रों की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी.
केंद्रीय ड्रग रेगुलेटर होगा मजबूत
दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) को और मजबूत किया जाएगा. इससे बाजार में बेहतर और सुरक्षित दवाओं की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है.
भारत को ग्लोबल बायोफार्मा हब बनाने का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है. इसके तहत उत्पादन बढ़ाने, नई तकनीकों को अपनाने और सात प्रमुख सेक्टर्स में मैन्युफैक्चरिंग स्केल-अप करने की योजना है. यह कदम दवाओं की कीमत कम करने में मदद करेगा.
इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक क्षेत्रों पर जोर
बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को पावरफुल पुश देने की बात कही गई है ताकि लंबे समय तक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके. सरकार शहरों को आर्थिक क्षेत्रों के रूप में विकसित करने और पुराने औद्योगिक सेक्टर्स को पुनर्जीवित करने की योजना पर भी काम करेगी.