संसद (Parliament) के बजट सत्र (Budget Session) की तारीख का ऐलान हो चुका है. इस बार संसद का बजट सत्र 28 जनवरी 2026 से शुरू होकर 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा. बजट सत्र का पहला हिस्सा 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा. इस सत्र का दूसरा हिस्सा 9 मार्च से शुरू होगा, जो 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा. आइए जानते हैं आखिर संसद के सत्र कितने तरह से होते हैं और उनमें क्या अंतर होता है?
क्या होता है संसद सत्र
लोक सभा (Lok Sabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha) के सदस्यों के प्रस्ताव को पारित करना, विधेयक पर चर्चा करना, प्रस्ताव पारित करने के लिए समर्थन देना और विधेयक को पास करने के लिए मतदान करना, यह सभी संसदीय प्रक्रिया (Parliamentary Process) को जिस समय के लिए निश्चित किया जाता है, उसे संसद सत्र (Parliament Session) कहा जाता है. संसद सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होता है.
तीन तरह के होते हैं संसद के सत्र
1. बजट सत्र (Budget Session).
2. मॉनसून सत्र (Monsoon Session).
3. शीतकालीन सत्र (Winter Session).
नोट: जरूरत पड़ने पर चौथा सत्र भी बुलाया जाता है, जिसे विशेष सत्र कहते हैं. विशेष सत्र आपातकालीन स्थिति या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा होता है तो बुलाया जाता है. यह सत्र राष्ट्रपति, मंत्रिमंडल की सलाह पर आयोजित किया जाता है.
1. बजट सत्र
ससंद में सबसे पहले बजट सत्र आता है. यह सत्र संसद का सबसे लंबा और महत्वपूर्ण सत्र होता है. बजट सत्र अधिकांश फरवरी में शुरू होकर मई तक चलता है. यह सत्र हर साल दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरू होता है. बजट सत्र के दौरान केंद्र सरकार एक वित्तीय वर्ष (Financial Year) का बजट पेश करती है. सरकार संसद और इसके माध्यम से पूरे देश को अपने फाइनेंस के बारे में बताती है. सरकार बताती है कि एक वित्तीय वर्ष में कितनी आमदनी होगी, कितना खर्च होगा और बचत कितनी होगी. बजट सत्र दो चरणों में पूरा होता है. पहला चरण बजट प्रस्तुति और सामान्य चरण का और दूसरा चरण विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक पर चर्चा का होता है.
2. मॉनसून सत्र
मॉनसून सत्र जुलाई से सितंबर के बीच चलता है. इस दौरान देश में मॉनसूनी बारिश हो रही होती है इसीलिए इसे मॉनसून सत्र कहा जाता है. आमतौर पर मॉनसून के सीजन का सत्र सबसे छोटा होता है. इस सत्र में विधायी कार्यों और नीतिगत मुद्दों पर चर्चा की जाती है. मॉनसून सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को प्रस्तुत करती है. मॉनसून सत्र में प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान संसद में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाती है. विपक्ष इस दौरान सरकार को घेरता है.
3. शीतकालीन सत्र
हर साल संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर से दिसंबर तक चलता है. यह संसद का साल का अंतिम सत्र होता है. इस सत्र में उन मामलों को उठाया जाता है, जिन पर पहले विचार नहीं किया जा सकता था. यह सत्र संसद के दूसरे सत्र के दौरान विधायी कार्य की अनुपस्थिति की भरपाई करता है. शीतकालीन सत्र के दौरान जनहित के मुद्दे, नीति समीक्षा और विधायी कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है. शीतकालीन सत्र में प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान विपक्षी पार्टियां सरकार को घेरती हैं.
कौन लेता है संसद सत्र बुलाने को लेकर फैसला
आपको मालूम हो कि संसद का कोई भी सत्र शुरू करने से पहले कैबिनेट कमेटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स इसके लिए एक कैलेंडर तैयार करती है. इसके बाद इस कैलेंडर को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है. राष्ट्रपति आर्टिकल 85 के तहत संसद सत्र को लेकर फैसला लेते हैं. सांसदों को सत्र की सूचना एक समन के जरिए राष्ट्रपति की ओर से भेजी जाती है. संसद की कार्यवाही सुबह 11:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक चलती है. इसमें दोपहर 1:00 बजे से 2:00 बजे तक का समय लंच का होता है.