जालना जिले के परतूर तहसील के वाघाडी गांव में बेटियों की शिक्षा के लिए आजादी के बाद पहली बार नियमित बस सेवा शुरू की गई है. लंबे समय से चली आ रही ग्रामीणों की मांग आखिरकार पूरी होने के बाद गांव में खुशी का माहौल है. बस के गांव में पहुंचते ही ग्रामीणों ने फूलों की बारिश, ढोल-ताशों के गजर और जोरदार जयघोष के साथ बस का भव्य स्वागत किया.
वाघाडी गांव की कई छात्राएं स्कूल और कॉलेज की शिक्षा के लिए आसपास के शहरों और गांवों में जाती हैं. लेकिन गांव से नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था. बस के लिए लंबे समय तक इंतजार करना, निजी वाहनों पर निर्भर रहना और समय पर स्कूल-कॉलेज पहुंचने की चिंता जैसी समस्याएं छात्राओं के सामने थीं. साथ ही बेटियों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता की चिंता भी लगातार बनी रहती थी.
ग्रामीणों ने छात्राओं की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए गांव से नियमित बस सेवा शुरू करने की मांग कई वर्षों से संबंधित प्रशासन और परिवहन विभाग के सामने रखी थी. आखिरकार इस मांग को मंजूरी मिली और वाघाडी गांव में बस सेवा शुरू हुई. बस के गांव में पहुंचते ही ग्रामीणों ने ढोल-ताशे बजाकर और फूल बरसाकर उसका स्वागत किया. इस दौरान छात्राओं और उनके अभिभावकों में भी खासा उत्साह देखने को मिला. नई बस सेवा शुरू होने से अब वाघाडी की छात्राओं के लिए स्कूल और कॉलेज तक आने-जाने का सफर आसान और सुरक्षित होने की उम्मीद है. परिवहन सुविधा मिलने से छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा.
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ बस सेवा की शुरुआत नहीं, बल्कि गांव की बेटियों के शिक्षा के अधिकार और उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. कई छात्राओं और अभिभावकों ने बस सेवा शुरू होने पर खुशी जताते हुए कहा कि अब बेटियों को पढ़ाई के लिए आने-जाने में होने वाली परेशानियां काफी हद तक दूर होंगी.
वाघाडी गांव में आजादी के बाद पहली बार बेटियों की शिक्षा के लिए शुरू हुई यह बस सेवा ग्रामीणों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं रही. फूलों की बारिश, ढोल-ताशों का गजर और ग्रामीणों का उत्साह इस ऐतिहासिक पल का गवाह बना. यह बस सेवा आने वाले दिनों में गांव की अनेक बेटियों के शिक्षा के सपनों को नई रफ्तार देने वाली साबित हो सकती है.