30 सितंबर को बिहार के खगड़िया में एक सरकारी स्कूल की सीढ़ी अचानक गिर गई थी. इस हादसे में दुर्भाग्यवश एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि कई बच्चे घायल हो गए. इस घटना के बाद सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. इसी घटना के बाद छपरा शहर के एक सरकारी स्कूल रामचंद्र प्रसाद महाशय आर्य शिशु विद्यालय का रियलिटी भी समने आई. टीम जब स्कूल पहुंची तो वहां की स्थिति काफी भयावह नजर आई.
सीढ़ी की छत से गायब हो चुका है प्लास्टर
स्कूल में दाखिल होते ही लोगों की नजर ऊपर जाने वाली सीढ़ी पर पड़ी. सीढ़ी के ऊपर बनी छत के प्लास्टर का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिर चुका था. प्लास्टर हटने के बाद छत में लगा सरिया साफ दिखाई दे रहा था. इतना ही नहीं, प्लास्टर का कुछ हिस्सा अभी भी ऐसी स्थिति में है, जो कभी भी टूटकर गिर सकता है. अगर यह हिस्सा अचानक गिरता है तो किसी बच्चे या शिक्षक को गंभीर चोट लग सकती है और कोई अनहोनी भी हो सकती है.
जिन कमरों में बच्चे पढ़ रहे, वहां भी खतरा
ऊपर बच्चों के पढ़ने वाले कमरों की स्थिति और भी खराब है. जिन कमरों में बच्चे पढ़ाई कर रहे थे, उनकी छतों का प्लास्टर भी कई जगह गायब था. बताया गया कि छत का प्लास्टर कुछ दिन पहले ही गिर चुका है. प्लास्टर गिरने के बाद छत में लगा सरिया साफ नजर आ रहा है. इसके बावजूद बच्चे इसी जर्जर छत के नीचे पढ़ाई कर रहे हैं और शिक्षक उन्हें पढ़ा रहे हैं.
बच्चों के अंदर भी बना हुआ है डर
जर्जर कमरों में पढ़ने वाले बच्चों के बीच भी डर का माहौल है. उन्हें आशंका रहती है कि कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है. स्कूल के कई कमरों की स्थिति छत का प्लास्टर गिरने के कारण इतनी खराब हो चुकी है कि उन्हें पूरी तरह परित्यक्त कर दिया गया है. इन कमरों की हालत देखकर साफ पता चलता है कि छतों का प्लास्टर लगातार गिरता रहता है.
शिक्षक ने बताया- कई कमरों में पढ़ाई बंद
विद्यालय के वरीय शिक्षक उपेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि कमरों की जर्जर स्थिति को देखते हुए कई कमरों में पठन-पाठन का काम बंद कर दिया गया है. जिन कमरों में अभी बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, उनकी स्थिति भी काफी खतरनाक है और कभी भी हादसा हो सकता है. उन्होंने बताया कि सौभाग्य की बात है कि अभी तक छत या सीढ़ी का प्लास्टर गिरने से कोई हादसा नहीं हुआ है. स्कूल की इस स्थिति के बारे में स्थानीय शिक्षा विभाग को कई बार लिखित रूप से जानकारी दी जा चुकी है.
250 बच्चों का नामांकन, कमरों की कमी बड़ी समस्या
इस विद्यालय में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों की पढ़ाई होती है. यहां लगभग 250 बच्चों का नामांकन है. शिक्षक के मुताबिक, अगर किसी दिन सभी 250 बच्चे स्कूल आ जाएं तो क्षतिग्रस्त कमरों और कमरों की कमी के कारण उन सभी बच्चों को बैठाना भी मुश्किल हो जाएगा. कमरों की कमी के चलते स्कूल में बच्चों का नया नामांकन भी नहीं किया जा रहा है. ऐसे में जर्जर भवन के बीच बच्चों की पढ़ाई जारी है और स्कूल में किसी बड़ी अनहोनी का खतरा बना हुआ है.
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