बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान मुरासु लगातार आगे बढ़ रहा है. 1 नवंबर 2026 को दोपहर 2:30 बजे यह दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर केंद्रित था. बीते 6 घंटों के दौरान तूफान 27 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा. इसके चलते आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों के लिए चक्रवात का अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग के मुताबिक, 2 नवंबर की सुबह तक इसके गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका है. ऐसे में सवाल है कि इसका असर दिल्ली-NCR, यूपी, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान तक पहुंचेगा या नहीं?
आंध्र प्रदेश के तट पर सबसे ज्यादा असर की आशंका
पूर्वानुमान के अनुसार, 2 नवंबर की सुबह तक यह गंभीर चक्रवाती तूफान बन सकता है. इसके बाद उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार करने की आशंका है. इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है, जबकि झोंकों की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. रिपोर्ट के आधार पर आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में तूफान और तेज हवाओं का खतरा सबसे ज्यादा है.
उत्तर भारत में क्या पड़ेगा तूफान का असर?
फिलहाल चक्रवाती तूफान मुरासु का उत्तर भारत के मौसम पर असर पड़ने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है. दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश में बारिश को लेकर अभी कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है. मौसम विभाग ने भी इन इलाकों में बारिश की संभावना नहीं जताई है. वहीं, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के लिए भी दिए गए पूर्वानुमान में बारिश या खराब मौसम को लेकर कोई चेतावनी नहीं है. फिलहाल तूफान का सीधा खतरा दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों पर बना हुआ है.
कहां बारिश और तूफान का खतरा ज्यादा?
चक्रवाती तूफान मुरासु का सबसे ज्यादा असर दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में देखने को मिल सकता है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 2 नवंबर की सुबह तक यह पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है. इसके बाद यह उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा और 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार कर सकता है. इस दौरान तूफान की अनुमानित रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है, जबकि तेज झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं. तटीय इलाकों में तेज हवाओं और खराब मौसम का खतरा रहेगा.
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