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भगवान नहीं, क्रांतिकारियों की तस्वीर... लाल किले के पास है अनोखा मंदिर

दिल्ली में लाल किले के पास एक अनोखा मंदिर है. इस मंदिर में किसी भगवान की मूर्ति या तस्वीर नहीं है, बल्कि इस मंदिर उन क्रांतिकारियों की तस्वीर और जानकारी है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सबकुछ दे दिया. एक क्रांतिकारी ने अपने 6 बेटों को क्रांतिकारी बनाया.

Delhi Unique Temple
मनीष चौरसिया
  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:36 PM IST

देश की आजादी के लिए हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया. कई क्रांतिकारियों की भूमिका इतिहास के पन्नों में दस्तावेज हुई तो कई बलिदानी गुमनामी में ही रह गए. लेकिन दिल्ली के चाँदनी चौक में एक ऐसा मंदिर है, जहां गुमनाम क्रांतिकारियों की तस्वीरें लगी हुई हैं. लाल किले के पास मौजूद ये अनोखा मंदिर करीब 56 साल से आजादी के नायकों की यादों को संजोए हुए है.

क्रांतिकारियों का अनोखा मंदिर-
दिल्ली का लाल किला, जहां से हर साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं. लेकिन इसी ऐतिहासिक इलाके के पास एक ऐसी जगह है, जो स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम और चर्चित क्रांतिकारियों की याद दिलाती है. इस मंदिर को एक पूर्व क्रांतिकारी स्वर्गीय स्वर्ण लाल परूथी ने बनवाया था. आजादी के बाद उन्हें एहसास हुआ कि कई क्रांतिकारियों के नाम गुमनाम रह गए, ये बात उन्हें परेशान कर रही थी. ऐसे में उन्होंने अलग अलग राज्यों से 100 क्रांतिकारियों की तस्वीर और उनके बारे में जानकारी जुटाई और यहां उनका मंदिर बना दिया. मंदिर में लगी तस्वीरों के नीचे उस क्रांतिकारी का योगदान भी लिखा है. जैसे यहां एक क्रांतिकारी की तस्वीर है, जिनके बारे में लिखा गया है कि उन्होंने सुभाष चंद बोस की मदद की थी.

उस शख्स की कहानी, जिसने 6 बेटों को बनाया क्रांतिकारी-
मंदिर के अंदर और बाहर 100 से ज्यादा क्रांतिकारियों की पेंटिंग्स लगाई गई हैं. ऐसे क्रांतिकारी की कहानी, जिन्होंने अपने 6 बेटों के क्रांतिकारी बनाया और खुद उन्हें पिस्टल चलाने की ट्रेनिंग दी. उनके एक बेटे ने एक अंग्रेज अफ़सर की हत्या की. जिसके बाद बेटे को फाँसी हो गई.

अमेरिका में रहने वाले क्रांतिकारी की तस्वीर-
ऐसे ही कई और क्रांतिकारियों की तस्वीरें इस मंदिर में लगी हुई हैं. एक क्रांतिकारी, जिनकी मौत बम का परीक्षण करते हुए हुई थी. वहीं एक क्रांतिकारी ने अमेरिका में रहते हुए कई क्रांतिकारियों की मदद की और बाद में उन्हें फाँसी हो गई.

करीब 56 साल से ये जगह स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को अपने भीतर समेटे हुए है. यहां आने वाले लोगों के लिए ये सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आजादी की उस लड़ाई की याद है, जिसमें न जाने कितने लोगों ने अपना जीवन कुर्बान कर दिया. आज जब नई पीढ़ी आजादी के इतिहास को किताबों और तस्वीरों के जरिए जानती है, ऐसी जगहें इतिहास को आंखों के सामने लाने का काम करती हैं.

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