दिल्ली एक ऐसा शहर है जो अपने इतिहास के साथ-साथ प्रदूषण के लिए भी जाना जाता है. खासकर प्रदूषण का स्तर उस वक्त बढ़ जाता है जब बरसात खत्म होती है और ठंड का दौर शुरू होता है. सितंबर के अंत से लेकर पूरे ठंड के मौसम में प्रदूषण की मार लोगों को झेलनी पड़ती है. वहीं दिल्ली की प्रदूषित हवा को कम करने के लिए अब नई तकनीक का सहारा लिया जा रहा है. पहल के मुताबिक, राजधानी में ऐसे स्मार्ट स्मॉग पोल लगाने की तैयारी हो रही है, जो सिर्फ सड़क पर रोशनी देने वाले पोल का काम ही नहीं करेंगे, बल्कि हवा की गुणवत्ता पर भी नजर बनाए रखेंगे और गुणवत्ता को भी बढ़ावा देंगे. इन पोल में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे प्रदूषक कणों की निगरानी करने के साथ-साथ मिस्ट स्प्रे सिस्टम भी शामिल है. जिसके जरिए प्रदूषण कम करने की कोशिश भी की जा रही है. फिलहाल यह तकनीक परीक्षण के दौर में है और इसके असर का आकलन किया जा रहा है.
एक पोल में कई काम, इसलिए खास है तकनीक
अगर आप देखेंगे तो पहली नजर में ये स्मार्ट पोल किसी सामान्य स्ट्रीट लाइट जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन इनमें कई सुविधाएं एक साथ जोड़ी गई हैं. पोल में हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने वाला सिस्टम, प्रदूषण कम करने के लिए मिस्ट स्प्रेयर और प्रदूषण से जुड़ा डेटा दिखाने वाली डिजिटल स्क्रीन लगी है. यानी एक ही पोल रोशनी देने के साथ हवा की निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण की कोशिश भी कर रहा है. हालांकि अभी परीक्षण के लिए इन्हें दिल्ली की कुछ ही जगहों पर लगाया गया है.
इन स्मार्ट पोल की डिजिटल स्क्रीन पर पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर लगातार अपडेट होता है. जानकारी के मुताबिक, प्रदूषण से जुड़े आंकड़े हर कुछ मिनट में अपडेट हो जाते हैं. इससे आसपास मौजूद लोगों को वहीं पर हवा की स्थिति की जानकारी मिल जाती है.
मिस्ट स्प्रे से कैसे कम होगा प्रदूषण?
इस तकनीक में पोल के जरिए बेहद बारीक पानी की धुंध यानी मिस्ट हवा में छोड़ी जाती है. दावा है कि पानी की बूंदों के संपर्क में आने के बाद हवा में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषक कण अपेक्षाकृत भारी हो जाते हैं और नीचे बैठने लगते हैं. इस तरह आसपास की हवा में मौजूद पीएम 2.5, पीएम 10 और धूल के कणों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है. स्मार्ट पोल की स्क्रीन पर सिर्फ उस समय की हवा का प्रदूषण स्तर ही नहीं दिखेगा. इसमें पिछले 24 घंटे के दौरान सिस्टम ने कितनी हवा को साफ किया, इसकी जानकारी भी दिखाई देगी. एक स्मार्ट पोल की स्क्रीन पर 24 घंटे में ट्रीट की गई हवा का आंकड़े भी दिखाई देंगे. हालांकि खुले वातावरण में यह तकनीक वास्तव में कितना असर करती है, इसका पता परीक्षण के बाद ही चलेगा.
IIT दिल्ली करेगी तकनीक के असर की जांच
इस पायलट प्रोजेक्ट का असर जांचने के लिए तकनीकी मूल्यांकन किया जा रहा है. IIT दिल्ली के साथ नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी और इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी यानी ICAT भी प्रदूषण कम करने वाली अलग-अलग तकनीकों की स्वतंत्र निगरानी कर रहे हैं. स्मार्ट पोल और दूसरी तकनीकों से वास्तव में प्रदूषण कितना कम हो रहा है, इसका आकलन किया जाएगा. दिल्ली सरकार के इनोवेशन चैलेंज के तहत कुल 22 तकनीकों का परीक्षण किया जा रहा है. इनमें 13 तकनीकें वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए हैं, जबकि 9 तकनीकों का इस्तेमाल वातावरण में मौजूद प्रदूषण को कम करने के लिए किया जा रहा है. इनमें बड़े एयर प्यूरीफायर, एयर ट्रीटमेंट टावर, पोल और रोड डिवाइडर पर लगाए जाने वाले डस्ट कलेक्टर और पार्टिकुलेट एग्रीगेशन सिस्टम जैसी तकनीकें भी शामिल हैं.
फिलहाल स्मार्ट पोल को लेकर सबसे अहम बात इसके परीक्षण का नतीजा है. अगर विशेषज्ञों की जांच में यह तकनीक खुले वातावरण में पीएम 2.5, पीएम 10 और धूल के कणों को कम करने में प्रभावी पाई जाती है, तो भविष्य में इसे दिल्ली के दूसरे इलाकों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
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