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Delhi Carbon Garden: देश का पहला कार्बन गार्डन, 4 साल में बनकर हुआ तैयार

डीयू में हवा और मिट्टी के प्रदूषण से निपटने के लिए एक अनोखी पहल की गई है. एक प्रोफेसर ने देश का पहला कार्बन गार्डन बनाया है. करीब 4 साल की मेहनत से तैयार यह गार्डन बढ़ते वायु प्रदूषण और मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

देश का पहला कार्बन गार्डन
मनीष चौरसिया
  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:12 PM IST

दिल्ली विश्वविद्यालय में हवा और मिट्टी के बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए एक अनोखी पहल की गई है. डीयू के प्रोफेसर ने देश का पहला 'कार्बन गार्डन' विकसित किया है, जो न सिर्फ प्रदूषण कम करेगा, बल्कि शहरी इलाकों के लिए एक मॉडल भी बनेगा.

भारत का पहला कार्बन गार्डन तैयार-
दिल्ली की जहरीली हवा के बीच उम्मीद की एक नई किरण सामने आई है. दिल्ली विश्वविद्यालय के बॉटनी विभाग के हेड और रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल के चेयरपर्सन प्रोफेसर दीनाबंधु साहू ने डीयू कैंपस में भारत का पहला 'कार्बन गार्डन' तैयार किया है.

4 साल की मेहनत से तैयार गार्डन-
करीब 4 साल की मेहनत से तैयार यह गार्डन बढ़ते वायु प्रदूषण और मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
आमतौर पर जो गार्डन तैयार किए जाते हैं, वो सुंदर फूलों के लिहाज से बनाए जाते हैं. फूल सीजनल होते हैं, उनका सीजन जाते ही वो खत्म हो जाते हैं. ऐसे में वो हवा को साफ रखने में कम योगदान दे पाते हैं. लेकिन इस कार्बन गार्डन में ऐसे पेड़ पोधे लगाए गए हैं, जो पूरे साल बने रहते हैं और हवा को साफ करते रहते हैं.

खास तरीके से किया गया है तैयार-
इस गार्डन में शैवाल, फफूंद, बैक्टीरिया, ब्रायोफाइट्स, टेरिडोफाइट्स, जिम्नोस्पर्म्स और एंजियोस्पर्म्स जैसे विभिन्न जीवन रूपों को शामिल किया गया है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह एक 'अर्बन इकोसिस्टम मॉडल' के साथ-साथ भीड़भाड़ वाले शहर में 'मिनी बायोडायवर्सिटी पार्क' की तरह भी काम करे.

गार्डन में 45 प्रजातियों के पौधे-
सिर्फ 2000 वर्गफुट के छोटे से क्षेत्र में विकसित इस गार्डन में 45 प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं, जिनमें जड़ी-बूटियां, झाड़ियां और पेड़ शामिल हैं. जगह की कमी को देखते हुए इसे कॉम्पैक्ट लेकिन प्रभावी तरीके से तैयार किया गया है. यहाँ कोई पेड़ ऐसे हैं जिनके बारे में प्रोफेसर साहू कहते हैं कि अगर इन पेड़ों को दिल्ली की सीमा पर लगा दिए जाएं तो एक फेंसिंग की तरह काम करेगा. ऐसे ही कंदंब के पेड़ के एक प्रजाति है, जिसे भुवनेश्वर से एयरलिफ्ट किया गया था.

वायु प्रदूषण से दुनिया में 70 लाख मौत-
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया भर में हर साल 70 लाख से अधिक लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण होती है. भारत में यह आंकड़ा करीब 17 लाख है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में दिल्ली में हुई कुल मौतों में लगभग 15 प्रतिशत के लिए वायु प्रदूषण जिम्मेदार रहा.

इन्हीं चिंताजनक आंकड़ों के बीच तैयार किया गया कार्बन गार्डन पौधों और सूक्ष्मजीवों की मदद से वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों को अवशोषित कर मिट्टी को समृद्ध बनाने का काम करेगा.

इसमें अधिकतर देशज यानी स्थानीय पौधों को शामिल किया गया है, जिनमें हाइड्रोफाइट्स, जेरोफाइट्स और मेसोफाइट्स शामिल हैं. यहां एक ऐसा जीव भी मौजूद है जिसकी उत्पत्ति लगभग 1.3 अरब साल पुरानी मानी जाती है.

पेड़ जहां लंबे समय तक कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर कार्बन स्टॉक के रूप में संचित करते हैं, वहीं पेड़ों की छाल पर रहने वाले सूक्ष्मजीव मीथेन, हाइड्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य वाष्पशील यौगिकों जैसी जहरीली गैसों को भी कम करने में मदद करते हैं. बड़े कार्बन गार्डन में शैवाल तालाब भी बनाए जा सकते हैं.

प्रोफेसर साहू की सलाह-
प्रोफेसर साहू का कहना है कि अगर ऐसे छोटे-छोटे कार्बन गार्डन स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, आवासीय और कार्यालय परिसरों में विकसित किए जाएं तो इससे हवा और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा.

यह पहल न सिर्फ जहरीली हवा से राहत दिलाने की दिशा में एक प्रयोग है, बल्कि बेहतर जीवन गुणवत्ता और कम होते चिकित्सा खर्च की उम्मीद भी जगाती है.

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