दिल्ली में DTC और क्लस्टर बसों से सफर करने वाली महिलाओं के लिए जरूरी खबर है. अब मुफ्त बस यात्रा की सुविधा लेने के लिए कागज की पिंक टिकट नहीं मिलेगी. दिल्ली सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदलते हुए Pink Saheli Smart Card को अनिवार्य कर दिया है. यह नया सिस्टम 4 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है. यानी अब पात्र महिला यात्रियों को बस में फ्री सफर के लिए स्मार्ट कार्ड से ही यात्रा दर्ज करानी होगी.
Pink Saheli Smart Card से ऐसे मिलेगा फ्री सफर
दिल्ली की पात्र महिला निवासी इस कार्ड के जरिए DTC और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा कर सकती हैं. यह सुविधा AC और नॉन-AC दोनों तरह की बसों में लागू है. बस में सफर के दौरान यात्री को कार्ड को इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन यानी ETM पर टैप करना होगा. इससे उसकी यात्रा दर्ज हो जाएगी और कागज की टिकट की जरूरत नहीं पड़ेगी.
सरकार के मुताबिक, दिल्ली की पात्र महिला यात्रियों के साथ दिल्ली निवासी ट्रांसजेंडर लोगों को भी इस सुविधा के दायरे में रखा गया है. वहीं, जो महिलाएं मुफ्त यात्रा के लिए पात्र नहीं हैं, वे सामान्य किराया देकर बस में सफर कर सकती हैं.
NCMC तकनीक से लैस है कार्ड
Pink Saheli Smart Card NCMC आधारित है और इसमें 'टैप एंड गो' तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इस कार्ड को ऑनलाइन रिचार्ज भी किया जा सकता है. इसके अलावा यात्री अपनी यात्रा का डिजिटल रिकॉर्ड भी देख सकेंगी. भविष्य में इस कार्ड का इस्तेमाल मेट्रो और दूसरे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में भुगतान के लिए भी किया जा सकेगा. यानी सरकार धीरे-धीरे इसे एक ऐसे स्मार्ट कार्ड के रूप में विकसित कर रही है, जिसका इस्तेमाल अलग-अलग परिवहन सेवाओं में किया जा सके.
कागज वाली पिंक टिकट व्यवस्था खत्म
Pink Saheli Smart Card को इसी साल मार्च में लॉन्च किया गया था. इसके बाद कई बार कागज वाली पिंक टिकट व्यवस्था को जारी रखने की समयसीमा बढ़ाई गई. पहले 30 सितंबर से स्मार्ट कार्ड को अनिवार्य करने की बात कही गई थी. अब 4 अक्टूबर से नई व्यवस्था लागू कर दी गई है और कागज की पिंक टिकट बंद कर दी गई है.
करीब 19 लाख महिलाओं को मिल चुका कार्ड
अधिकारियों के अनुसार, अब तक करीब 19 लाख महिलाएं Pink Saheli Smart Card की सुविधा ले चुकी हैं. जिन महिलाओं ने अभी तक कार्ड के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, वे अब भी रजिस्ट्रेशन और कार्ड जारी कराने की प्रक्रिया पूरी कर सकती हैं. नई व्यवस्था की जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए बस डिपो और बसों में अनाउंसमेंट किए जाएंगे. इसके अलावा सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और दूसरे माध्यमों से भी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.
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