Advertisement

Surat: 11301 करोड़ का फंड, लेकिन स्कूली बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर... पास हुई थी कमरे बनानी की फाइल, लेकिन नहीं लग पाई एक भी ईंट

करोड़ों के बजट वाली सूरत महानगर पालिका की शिक्षा पद्धति पर उठ रहे सवाल. खड़सद गांव की प्राथमिक स्कूल में 5 कक्षाएं एक ही कमरे में रहीं चल.

जमीन पर बैठ पढ़ते बच्चे
संजय सिंह राठौर
  • सूरत,
  • 18 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:16 PM IST

11301 करोड़ रुपए के सालाना बजट वाली सूरत महानगर पालिका के शिक्षा तंत्र की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. महानगर पालिका की नगर प्राथमिक शिक्षण समिति द्वारा संचालित 'श्री खड़सद प्राथमिक शाला क्रमांक 384' बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बदहाली का शिकार है. यह स्कूल सिर्फ एक कमरे में चलने को मजबूर है, जहां कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को एक साथ पढ़ना पड़ रहा है.

बरामदे में बैठ पढ़ रहे बच्चे

सूरत महानगर पालिका के अधीनस्थ आने वाले के खड़सद गांव में स्थित इस प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 1 से कक्षा 5 तक के बच्चे पढ़ाई करने आते हैं. लेकिन स्कूल में पर्याप्त कमरे न होने की वजह से बच्चों को बैठने तक की जगह नहीं मिल पा रही है. कक्षा 3, 4 और 5 इन तीनों कक्षाओं के छात्रों को एक ही कमरे में एक साथ बेंचिस पर बिठाकर पढ़ाया जा रहा है. जबकि कक्षा 1 से 2 के छात्रों को क्लास रुम के बाहर जमीन पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है. 

इस तरह इस स्कूल में शिक्षक को बारी-बारी से तीनों कक्षाओं को संभालना पड़ता है. स्कूल में क्लास रुम जगह की भारी कमी के कारण इन नन्हे बच्चों को कमरे के बाहर खुले बरामदे में बैठकर पढ़ना पड़ रहा है. इस स्कूल में पढ़ने आने वाले बच्चों के लिए स्कूल में पर्याप्त बेंच तक नहीं हैं. जिसकी वजह से नन्हे मासूम बच्चों को जमीन पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है.

प्रशासन की सुस्ती के चलते नहीं बने कमरे

स्कूल के प्रिंसिपल ने स्वीकार किया कि स्कूल में अतिरिक्त कमरों के निर्माण का प्रस्ताव करीब 2 साल पहले ही पास हो चुका था. फाइलें भी बन गई थीं और बजट का प्रावधान भी किया गया था. लेकिन महानगर पालिका के प्रशासनिक स्तर पर सुस्ती और लापरवाही के कारण अब तक एक भी नई ईंट नहीं लगी है. नतीजतन, पिछले 2 सालों से शिक्षक और छात्र दोनों मौसम की मार झेलते हुए किसी तरह पढ़ाई-लिखाई का काम चला रहे हैं.

स्मार्ट सिटी के नाम पर ठप शिक्षण व्यवस्था

सूरत महानगर पालिका ने 2026 का सालाना बजट 11301 करोड़ रुपए पेश किया है और खुद को 'स्मार्ट सिटी' कहलाने पर गर्व करती है. लेकिन इसी पालिका के अधीन चलने वाले एक प्राथमिक स्कूल की यह हालत कई सवाल खड़े करती है. अगर बुनियाद यानी प्राथमिक शिक्षा ही इस तरह उपेक्षित रहेगी तो 'विकसित सूरत' का सपना अधूरा रह जाएगा. फिलहाल प्रशासन की तरफ से इस मामले में कोई ठोस जवाब नहीं आया है. लेकिन स्कूल की यह तस्वीर सूरत जैसे बड़े शहर में प्राथमिक शिक्षा की जमीनी हकीकत को बेनकाब करती है.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement