बदहाल अवस्था में अस्पताल
बदहाल अवस्था में अस्पताल
राजस्थान के अलवर जिले में राजस्थान के अलावा यूपी हरियाणा मेवात और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं. जिले में 26 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 76 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 374 सब सेंटर, एक जिला अस्पताल, एक जनाना अस्पताल एक शिशु अस्पताल, एक सेटेलाइट हॉस्पिटल, पांच यूपीएससी सहित मेडिकल कॉलेज जैसी सभी सुविधाएं हैं. लेकिन उसके बाद भी मरीज को इलाज के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं.
जिले के 31 सरकारी अस्पताल ऐसे हैं. जिनमें एक भी डॉक्टर नहीं है. यह अस्पताल केवल नर्सिंग कर्मी के भरोसे चल रहे है. जिले में 113 डॉक्टर के पद खाली है. सुपर स्पेशलिटी सेवाओं की कोई व्यवस्था नहीं है. 3 साल पहले राजीव गांधी सामान्य अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिल चुका है. अस्पताल में करीब 750 बेड लगे हुए हैं. प्रतिदिन अस्पताल में 4000 मरीजों की ओपीडी रहती है. राजस्थान में जयपुर के बाद सबसे ज्यादा मरीज की ओपीडी अलवर में रहती है.
मेडिकल कॉलेज में 53 वेंटीलेटर और 155 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर है. लेकिन ये चीज केवल कबाड़ हो रही है. वेंटिलेटर की आवश्यकता होने पर मरीज को रेफर कर दिया जाता है. साथ ही अस्पताल में सुपर स्पेशलिटी सेवाएं जैसे न्यूरो फिजिशियन, न्यूरोसर्जन, एंडोकोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट कार्डियो जैसी जरूरी सेवाओं के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है. ग्रामीण क्षेत्र में हालात और भी ज्यादा खराब है.
राजस्थान में जयपुर के एसएमएस अस्पताल के बाद अलवर का अस्पताल सबसे बड़ा है. यहां प्रतिदिन ओपीडी में 4 से 5 हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं. अलवर के अलावा मेवात हरियाणा उत्तर प्रदेश के मरीज भी इलाज के लिए यहां आते हैं. आसपास के जिले भरतपुर दौसा के प्रतिदिन सैकड़ो मरीज सरकारी अस्पताल में इलाज करते हैं.
पूरे जिले में जनरल अस्पताल को अगर हटा दें तो केवल 9 स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और जिले में केवल 42 जगह पर प्रसव की सुविधा है. वहां भी प्रसव नहीं किए जाते हैं. सभी मरीजों को जिला मुख्यालय स्थित जनाना अस्पताल में रेफर किया जाता है और वहां प्रतिदिन 50 से ज्यादा प्रसव होते हैं.
अलवर कैंसर का हॉटस्पॉट बन रहा है. हर साल अस्पताल में 10,000 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. लेकिन यहां पर थेरेपी की कोई व्यवस्था नहीं है. ऐसे में मरीज केवल धक्के खाते हैं और दवाइयां लेकर चले जाते हैं. दवाइयां भी मरीज को पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाती है.