एक साल में एक गाय से तीन बछड़े: हिमाचल की IVF तकनीक ने पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में रचा इतिहास

अत्याधुनिक IVF लैब पशुपालन विभाग के अंतर्गत स्थापित की गई है, जिसे केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहयोग से एचपी लाइवस्टॉक एंड पोल्ट्री डेवलपमेंट बोर्ड, चंडीगढ़ के माध्यम से वित्त पोषित किया गया है. प्रयोगशाला का शुभारंभ जनवरी 2025 में किया गया था और तब से यहां लगातार बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं.

IVF तकनीक से एक साल में एक ही जर्सी गाय से जन्मे तीन उच्च नस्ल के बछड़े
gnttv.com
  • धर्मशाला ,
  • 25 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:52 PM IST

हिमाचल प्रदेश के पशुपालन क्षेत्र में एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है. जिला कांगड़ा के पालमपुर स्थित बनूरी में स्थापित राज्य की पहली इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रयोगशाला ने एक ही उत्कृष्ट जर्सी गाय से एक वर्ष के भीतर तीन उच्च अनुवांशिक क्षमता वाले बछड़ों का सफल उत्पादन किया है. यह उपलब्धि प्रदेश में डेयरी विकास और पशुओं की बेहतर नस्ल तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

यह अत्याधुनिक IVF लैब पशुपालन विभाग के अंतर्गत स्थापित की गई है, जिसे केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहयोग से एचपी लाइवस्टॉक एंड पोल्ट्री डेवलपमेंट बोर्ड, चंडीगढ़ के माध्यम से वित्त पोषित किया गया है. प्रयोगशाला का शुभारंभ जनवरी 2025 में किया गया था और तब से यहां लगातार बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं.

क्या है पूरा प्रोसेस
IVF तकनीक के तहत उच्च आनुवंशिक क्षमता वाली जर्सी दाता गायों से अल्ट्रासाउंड की मदद से अंडाणु (ओओसाइट्स) एकत्र किए जाते हैं. इसके बाद इन्हें प्रयोगशाला में श्रेष्ठ नस्ल के सांडों के वीर्य से निषेचित कर नियंत्रित वातावरण में भ्रूण तैयार किया जाता है. तैयार भ्रूणों को स्वस्थ सरोगेट गायों में प्रत्यारोपित किया जाता है. इस प्रक्रिया से जन्मे बछड़े अपनी मूल दाता गाय के श्रेष्ठ गुणों को विरासत में लेते हैं, जिससे उनकी दूध उत्पादन क्षमता अधिक होती है और नस्ल में तेजी से सुधार संभव हो पाता है.

अब तक करीब 45 जर्सी और जर्सी-क्रॉसब्रेड भ्रूण सरोगेट
पशुपालन विभाग के अनुसार, अब तक करीब 45 जर्सी और जर्सी-क्रॉसब्रेड भ्रूण सरोगेट पशुओं में प्रत्यारोपित किए जा चुके हैं. इनमें से 10 फील्ड पशुओं और छह फार्म पशुओं में जर्सी भ्रूण से गर्भधारण की पुष्टि हुई है, जबकि दो मामलों में जर्सी क्रॉसब्रेड भ्रूण से सफल परिणाम मिले हैं. इस उपलब्धि के तहत एक जर्सी एमएसपी नर बछड़ा राजपुर में डॉ. राजीव फुल्ल के फार्म में जन्मा, जबकि उसी दाता गाय से एक मादा बछड़ी जर्सी कैटल ब्रीडिंग फार्म, पालमपुर में और एक अन्य नर बछड़ा कंडबाड़ी में एक किसान की सरोगेट गाय से पैदा हुआ.

विशेषज्ञों का मानना है कि IVF तकनीक से कम समय में बेहतर नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाई जा सकती है. इससे डेयरी उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. यह सफलता हिमाचल प्रदेश के पशुपालन क्षेत्र के लिए भविष्य में नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाली साबित हो सकती है.

रिपोर्टर: पूजा शर्मा

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