सिग्नल ऐप बना ठगी का नया हथियार! 5 दिन में 45 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी, बुजुर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर

गृह मंत्रालय के i4c विंग की तरफ से एक अलर्ट जारी किया गया है. जिसमें यह कहा गया है कि साइबर ठग सीनियर सिटीजन को डिजिटल अरेस्ट के जरिए शिकार बना रहे हैं और इसके लिए इंक्रिप्टेड सिग्नल ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है.

Digital Arrest: (Photo: ITG) 
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:13 PM IST

एक बार फिर बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग राज्यों में सीनियर सिटीजन साइबर फ्रॉड के शिकार हो रहे हैं. जिसमें डिजिटल अरेस्ट के जरिए उनकी जेब से साइबर ठग बड़े स्तर पर डाका डाल रहे है. ऐसे में गृह मंत्रालय के i4c विंग की तरफ से एक अलर्ट जारी किया गया है. जिसमें यह कहा गया है कि साइबर ठग सीनियर सिटीजन को डिजिटल अरेस्ट के जरिए शिकार बना रहे हैं और इसके लिए इंक्रिप्टेड सिग्नल ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है. सूत्रों ने जानकारी दी है कि साइबर ठग सबसे पहले साधारण फोन और व्हाट्सएप के जरिए डिजिटल अरेस्ट करते हैं और उसके कुछ देर बाद इंक्रिप्टेड सिग्नल ऐप में डाइवर्ट करने के लिए कहा जाता है.

इस दौरान जिसको डिजिटल अरेस्ट साइबर ठग करते हैं उसको सिग्नल ऐप में जाने के लिए धमकी और डराया जाता है. विक्टिम सिग्नल ऐप को अपने मोबाइल में डाउनलोड कर, उससे कनेक्ट हो जाता है और वह इस इंक्रिप्टेड ऐप में डिजिटल अरेस्ट हो जाता है. यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों में ऐसी लगातार रिपोर्ट्स केंद्रीय गृह मंत्रालय के i4c विंग के पास आ रही थी. जिसके बाद गृह मंत्रालय के i4c विंग ने एक बड़ा अलर्ट जारी किया है और कहा है कि सिग्नल ऐप के जरिए अगर कोई किसी को डिजिटल अरेस्ट करता है तो वह फ्रॉड है इससे बचें और किसी भी तरीके से ऐसे साइबर फ्रॉड में न फंसे.

कैसे हो रहा है साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में Signal app का इस्तेमाल बहुत रणनीतिक तरीके से किया जा रहा है. साइबर ठग इसे इसलिए चुनते हैं क्योंकि यह ज्यादा secure, private और trace करना मुश्किल होता है. सबसे पहले साइबर फ्रॉड करने वाले क्रिमिनल साधारण कॉल करके उस कॉल/मैसेज के को Signal app पर शिफ्ट कराते हैं. शुरुआत फोन कॉल / WhatsApp / SMS से होती है. खुद को पुलिस, CBI, ED, या कस्टम अधिकारी बताते हैं. फिर कहते हैं, 'यह मामला confidential है, Signal पर आ जाइए' इससे बातचीत private चैनल में चली जाती है.

End-to-End Encryption का फायदा Signal में मैसेज और कॉल end-to-end encrypted होते हैं. कोई तीसरा व्यक्ति (यहां तक कि पुलिस भी तुरंत) बातचीत नहीं देख सकती. इसलिए ठग आसानी से बिना ट्रैक हुए दबाव बनाते हैं. इस दौरान साइबर फ्रॉड करने वाले क्रिमिनल 'डिजिटल कस्टडी' का माहौल बनाते हैं. Signal पर वीडियो कॉल कराते है पीड़ित को घंटों isolate रखा जाता है. स्क्रीन शेयर और निगरानी करवाते हैं और उसके बाद कहा जाता है कि आपकी जांच चल रही है कुछ भी छुपाया तो जेल जाओगे. पूरा फाइनेंशियल कंट्रोल ले लेते हैं उसके बाद फर्जी डॉक्यूमेंट और वारंट भेज कर सिग्नल ऐप के जरिए बड़े स्तर पर फ्रॉड करते हैं और अंत में बड़े-बड़े अमाउंट ट्रांसफर करवाया जाता है.

सिग्नल ऐप की खासियत यह होती है कि इसके सर्वर को ढूंढ पाना सिक्योरिटी फोर्सेज के लिए काफी कठिन होता है. इस वजह से इस समय साइबर फ्रॉड करने वाले क्रिमिनल पहले साधारण फोन के जरिए वह किसी का डिजिटल अरेस्ट करते हैं. उसके बाद उसको सिगनल ऐप में ले जाकर के कई कई दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा जाता है. जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की गहन जांच इस वक्त कर रही हैं.

पिछले पांच दिनों में 45 करोड़ ठगे गए
सूत्रों से जानकारी मिली है कि, पिछले 5 दिनों में अगर बात करें तो डिजिटल अरेस्ट में सीनियर सिटीजन को सबसे ज्यादा शिकार बनाया गया है. जिसमें 45 करोड़ के आसपास की रकम को साइबर ठग लोगों के अकाउंट से लेकर उड़ गए हैं. अब इसकी गहन छानबीन की जा रही है कि आखिर किस तरीके से इतने बड़े अमाउंट को साइबर फ्रॉड करने वाले लोग ले उड़े.

70 से 75 साल के बुजुर्ग बन रहे शिकार
दरअसल, इस समय डिजिटल अरेस्ट के जरिए एक बार फिर देश के अलग-अलग हिस्सों से साइबर ठग बुजुर्ग लोगों को निशाना बनाकर उनके अकाउंट से पैसे उड़ा ले रहे हैं. पिछले 5 दिनों (लगभग 8–13 अप्रैल 2026) में डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड पर अलग-अलग राज्यों की जो रिपोर्ट्स मौजूद हैं. उसके मुताबिक 6–8 बड़े केस सामने आए हैं, जिसमें पुणे में डिजिटल अरेस्ट के मामले में 97 लाख साइबर ठग ले उड़े. इसके साथ ही नागपुर से जो खबर आई है उसके मुताबिक 2 करोड रुपए साइबर फ्रॉड हुआ है. यही नहीं कोलकाता में 61 लख रुपए और नोएडा में करीब 11 लख रुपए फ्रॉड के जरिए लुट गए.

CBI जांच जारी
इसके साथ ही दिल्ली में CBI जांच और उसकी रिपोर्ट की माने तो, पिछले कुछ दिनों में 23 करोड़ के आसपास साइबर ठग साइबर फ्रॉड के जरिए लोगों का ठगे. जिस पर लगातार कार्रवाई की जा रही है. हैदराबाद में एक केस साइबर सिक्योरिटी विंग ने पड़ा है जिसमें करीब 15 करोड़ रुपए साइबर ठग उड़ा ले गए. इसमें सबसे ज्यादा शिकार सीनियर सिटीजन हुए हैं जिनकी उम्र 70 से 75 साल के आसपास है. गृह मंत्रालय i4c विंग लगातार ऐसे के को मॉनिटर कर रहा है और अलर्ट जारी कर रहा है. कोई भी व्यक्ति सीबीआई और ED का अधिकारी बनकर ऑनलाइन किसी को समन नहीं भेजता. इसके लिए अलर्ट रहें और लगातार उनके द्वारा अलग-अलग प्लेटफार्म पर अलर्ट जारी किया जा रहा है. साथ ही ऐसी घटना होने पर 1930 पर रिपोर्ट करने की भी सलाह दी जा रही है. गृह मंत्रालय के साइबर विंग के मुताबिक किसी भी unknown व्यक्ति के कहने पर Signal app पर shift न हों digital arrest जैसी कोई चीज असली में नहीं होती कॉल कट करके खुद पुलिस/agency से verify करें तुरंत 1930 या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें.

रिपोर्टर: जीतेंद्र सिंह

ये भी पढ़ें: 

 

Read more!

RECOMMENDED