यूं तो हर मांए अपने बेटे पर जान छिड़कती हैं, लेकिन कभी-कभी कोई मां ममता ऐसी की मिसाल पेश करती है. जिसकी चर्चा करना लाजमी हो जाता है.जी हां ! मां की ममता की आज हम जो कहानी आपको दिखाने जा रहे हैं. उसे देखने के बाद आप भी उस महिला की ममता के साथ हिम्मत और भरोसे की दाद दिए बिना नहीं रह पाएंगे. यह कहानी एक ऐसी मां की है.जिसका मानसिक रूप से कमजोर बेटा सफर के दौरान उससे बिछड़ गया था. इसके बाद उस महिला ने आरपीएफ के एक सीनियर अधिकारी से अपने बेटे को ढूंढने की गुहार लगाई. एक मां की गुहार का आरपीएफ के अवसर पर इतना असर हुआ कि उन्होंने बच्चे को ढूंढने में पूरी ताकत लगा दी और आखिरकार 6 दिन के अंदर उस बच्चे को मां की गोद में सौंप दिया.
यह मामला दीनदयाल उपाध्याय रेलवे का है. यहां पर 21 अप्रैल को बिहार के औरंगाबाद जिले की रहने वाली महिला सुनीता देवी अपने बेटे के साथ ट्रेन से चुनार जा रही थी. जब ट्रेन बदलने के लिए सुनीता दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर उतरी थी. वहां पर ट्रेन का इंतेजार करते हुए उनकी आंख लग गई. इसी दौरान उनके साथ उनका 13 साल का मानसिक रूप से कमजोर बेटा राहुल बिछड़ गया. सुनिता ने अपने बेटे को बहुत खोजा, लेकिन उसका कुछ भी पता नहीं चला. इसके बाद सुनीता दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर मौजूद आरपीएफ थाने पहुंची और अपने बेटे के लापता होने की बात बताइ.
जिसके बाद आरपीएफ के जवान ने रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फूटेज देंखा. जिसमें महिला का बच्चा बिहार की ट्रेन में चढ़ते हुए दिखाई दिया. सुनीता देवी ने अपने बेटे को ढूंढते हुए भभुआ स्टेशन पहुंची, लेकिन काफी खोजबीन के बाद भी जब उनका बिछड़ा बेटा नहीं मिला तो प्लेटफार्म पर ही रोने लगी. उनको रोता देख किसी व्यक्ति ने डीडीयू रेल मंडल के आरपीएफ के वरीय सुरक्षा आयुक्त आशीष मिश्रा का मोबाइल नंबर दे दिया और कहा कि इनसे बात कर लीजिए यह आपकी मदद करेंगे.
इसके बाद सुनीता देवी ने आरपीएफ कमांडेंट को अपने बेटे के बिछड़ने की बात बताई और इस बात की गुहार लगाई कि आप ही मेरे बेटे को मुझसे मिला सकते हैं. एक मां की ममता की गुहार आरपीएफ कमांडेंट को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने रोहित को खोजने में पूरा अमला लगा दिया और लापता बच्चे को 6 दिन के अंदर ढूंढ निकाला.
सीनियर सिक्योरिटी कमिश्नर आरपीएफ डीडीयू रेल मंडल आशीष मिश्रा ने इस बारे में बताया कि 24 अप्रैल को मेरे पास एक फोन आया. फोन पर एक महिला थी जिसने बताया कि उसका बेटा 21 अप्रैल को लापता हो गया. जिसे उसने काफी ढ़ुंढ़ा लेकिन वह अभी तक नहीं मिला है. आखिरी बार बेटे को सीसीटीवी फुटेज में बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस में चढ़ते हुए देखा है. जिसके बाद पहले महिला को आश्वस्त दिया कि आप निश्चिंत रहिए आपको हमारी टीम पूरी मदद करेगी.
इसके बाद हमने भभुआ के स्टाफ और सासाराम के स्टाफ को निर्देश दिया कि इनकी मदद करें और तमाम सीसीटीवी फुटेज दिखाए. फिर हमने बीच में पढ़ने वाले सभी रेलवे के स्टेशनों के सीसीटीवी की फूटेज देंखी. महिला का बच्चा राजगीर रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी में दिंखा. जिसके बाद हमारी टीम ने बच्चे को ढ़ूढ़ निकाला. वहां पर महिला के मामा ने बच्चे की शिनाख्त की. आशीष मिश्रा ने आगे बताया कि मैं महिला के जज्बे को सलाम करता हूं. आज हमको और हमारी टीम को बहुत फक्र है कि हम इनके कुछ काम आए.
बच्चे के मिलने के बाद आरपीएफ कमांडेंट ने सुनीता देवी को सूचना दिया कि आपका बच्चा नारदीगंज थाने में मौजूद है.जहां जाकर वह अपने बच्चे को ले लें. आखिरकार एक मां की ममता की जीत हुई और उनको बिछड़ा बच्चा मिल गया. अपने बिछड़े बच्चे से मिलकर अनीता देवी काफी खुश हुई और पूरे परिवार के साथ दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पहुंचकर आरपीएफ कमांडेंट से मुलाकात की और उनका आभार व्यक्त किया. खोया हुआ बच्चा मिलने के बाद महिला ने कहा कि हमें कमांडेंट साहब की मदद से हमारा बच्चा मिला है. हम कमांडेंट साहब को धन्यवाद कहना चाहते हैं. हम जितना भी धन्यवाद दें उतना कम है. उन्होंने हमारी बहुत मदद की है.उन्होंने हमसे कहा था कि जब तक आपका बच्चा नहीं मिलेगा तब तक हम मदद करते रहेंगे और हमारा बच्चा मिल गया. हमारा बच्चा हमको मिल गया है हम बहुत खुश हैं.
(चंदौली से उदय गुप्ता की रिपोर्ट)