डॉक्टर जो सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक, कैंसर का इलाज करते हैं. उनके लिए अक्सर अपने परिवार या निजी जिंदगी के लिए समय निकालना काफी मुश्किल होता है लेकिन, डॉ नरसिम्हैया श्रीनिवासैया एक ऐसे डॉक्टर हैं जो कैंसर के मरीजों का इलाज करने के साथ-साथ किसानी भी करते हैं. यह हमेशा से ही प्रकृति के बीच रहना पसंद करते हैं और धरती माता के करीब रहना चाहते हैं.
अस्पताल से लौटने के बाद डॉ नरसिम्हैया श्रीनिवासैया एक बागवान, फूलवाला और किसान हैं. 2000 के दशक की शुरुआत में अमेरिका और यूरोप की अपनी व्यापक यात्रा के बाद, उन्होंने भारत में काम के साथ-साथ गार्डनिंग करने का फैसला किया. इसे लेकर उन्होंने चिक्कबल्लापुरा में नंदी पहाड़ियों के पास एक इको म्यूजियमनंदी निसर्ग धाम बनाया.
श्रीनिवासैया इस जगह को 'धरती माता' से बना एक क्षेत्र कहते हैं, जहां कोई भी जा सकता है और प्रकृति से जुड़ा रह सकता है. एक किसान परिवार में पले-बढ़े, श्रीनिवासैया का पालन-पोषण एक किसान के जीवन में आने वाली कठिनाइयों के बीच हुआ. हालांकि, खेती के लिए उनकी दृष्टि कुछ परे थी.
एक जंगली आम के पौधे से शुरू किया था सफर
20 साल पहले एक जंगली आम के पौधे के इन्होंने ये सफर शुरू किया था. अब इन्होंने एक इको-म्यूजियम बना डाला है. यह एक छोटे जंगल से कम नहीं है, जो कि बीज, फल, सब्जियों की एक विस्तृत श्रृंखला का घर है. यहां जड़ी-बूटियां, तालाब, मोर और यहां तक कि कुछ बंदर भी हैं. इस इको-म्यूजियम को लोगों, विशेष रूप से बच्चों को प्रकृति के बारे में शिक्षा देने के लिए बनाया गया था.
श्रीनिवासैया ने बनाए हैं पांच बड़े जलाशय
श्रीनिवासैया ने पहाड़ियों से निकलने वाली पांच नदियों के नाम पर पांच बड़े जलाशय भी बनाए हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने राजकालुवे मॉडल के साथ जल संरक्षण के सदियों पुराने पारंपरिक तरीके को अपनाया है. वह आधुनिकता के लिए जगह देने के बजाय कृषि की जन्मभूमि को संरक्षित करने में विश्वास करते हैं. श्रीनिवासैया चाहते हैं कि बच्चे उनके इस खेत का पता लगाएं और अपने कृषि कौशल को जल्द से जल्द सुधारें.
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