रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों के लिए प्रोविडेंट फंड की रकम बेहद महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में अगर PF क्लेम के निपटारे में देरी हो जाए तो कर्मचारी को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. मुंबई की एक कंज्यूमर कोर्ट ने ऐसे ही मामले में कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO को 35 दिन की देरी के लिए 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है. चलिए आपको बताते हैं पूरा मामला क्या है.
20 दिन में क्लेम निपटाना
मुंबई उपनगरीय जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अपने हालिया आदेश में कहा कि EPFO को कर्मचारी का PF क्लेम निर्धारित 20 दिनों के भीतर निपटाना चाहिए था. आयोग ने तय समय में क्लेम का भुगतान नहीं करने को सेवा में कमी माना है. शिकायतकर्ता Fleet Maritime Services India Pvt Ltd के पूर्व कर्मचारी थे. उन्होंने बताया कि उन्होंने 19 अक्टूबर 2016 को अपना पूरा PF क्लेम EPFO के पास जमा किया था. इसके बावजूद निर्धारित समय में उनके क्लेम का निपटारा नहीं किया गया.
EPFO ने दी थी ये दलील
EPFO ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कर्मचारी ने मूल क्लेम के साथ जरूरी ज्वाइंट डिक्लेरेशन जमा नहीं किया था. इसी वजह से उनका आवेदन 7 नवंबर 2016 को वापस कर दिया गया था. EPFO के मुताबिक उसे सभी जरूरी दस्तावेज 2 दिसंबर 2016 को मिले और इसके बाद 14 दिसंबर 2016 को क्लेम का निपटारा कर दिया गया. EPFO ने इसी आधार पर दावा किया कि उसकी तरफ से कोई देरी नहीं हुई थी.
कोर्ट ने EPFO की दलील नहीं मानी
आयोग ने EPFO की दलील को स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने कहा कि संगठन यह साबित करने में नाकाम रहा कि 19 अक्टूबर को जमा किया गया क्लेम अधूरा था. EPFO की ओर से ऐसा कोई लिखित रिजेक्शन लेटर या कमी से जुड़ी सूचना भी पेश नहीं की गई, जिससे कर्मचारी को बताया गया हो कि उसके आवेदन में जरूरी दस्तावेज नहीं हैं.
35 दिन की देरी पर मिलेगा ब्याज
आयोग ने EPFO को 14,06,272 रुपये की PF राशि पर 35 दिनों की देरी के लिए 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है. ब्याज की गणना 9 नवंबर 2016 से 13 दिसंबर 2016 तक की अवधि के लिए होगी. EPFO को आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया है.
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