फिरोजपुर सिविल अस्पताल परिसर में 5.5 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया अत्याधुनिक आई अस्पताल आज खुद बदहाली का शिकार है. जिस अस्पताल को मरीजों की आंखों की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बनाया गया था. उसकी मौजूदा स्थिति देखकर अस्पताल की हालत पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
अस्पताल की इमारत में कई जगह खिड़कियां टूट चुकी हैं, दरवाजे और पंखे समेत अन्य सामान चोरी हो चुका है. मरीजों के लिए बनाए गए वार्डों की खिड़कियां भी खस्ताहाल हैं. आंखों के मरीजों को धूल-मिट्टी और सीधी धूप से बचाने की जरूरत होती है, लेकिन टूटी खिड़कियों के कारण वार्डों में मरीजों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
अस्पताल के रजिस्ट्रेशन रूम को स्टोर रूम में बदल दिया गया है. तीन मंजिला आई अस्पताल की पूरी बिल्डिंग में मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए पीने के पानी की कोई उचित व्यवस्था नहीं है. मरीजों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है.
अस्पताल के वॉशरूम भी पूरी तरह से खराब हालत में हैं. यहां तक कि मरीजों के लिए बनाए गए वार्ड के एक वॉशरूम में तो दरवाजा तक नहीं है, जिसके चलते पर्दा लगाकर काम चलाया जा रहा है. ऐसे में मरीजों, खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
अस्पताल में आंखों की जांच करवाने पहुंची एक महिला ने बताया कि डॉक्टर ने जांच के दौरान उसकी आंखों में शुगर के कारण ज्यादा समस्या बताई. उनकी आंखों के पर्दो में समस्या है और फरीदकोट मेडिकल कॉलेज जाकर जांच करवाने की सलाह दी गई है. महिला के अनुसार, अब उसे इलाज के लिए या तो फिरोजपुर से बाहर जाना पड़ेगा या निजी अस्पताल का रुख करना होगा.
सिविल अस्पताल के आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर दीक्षित सिंगला ने बताया कि अस्पताल में मरीजों की आंखों की जांच के साथ-साथ मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जा रहे हैं. हालांकि, सुपर स्पेशलिस्ट स्तर की सुविधाओं के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है. उन्होंने बताया कि अस्पताल से पंखे और अन्य सामान चोरी होने की घटनाएं भी सामने आई हैं और इस संबंध में कई बार शिकायतें दर्ज करवाई जा चुकी हैं.
वहीं आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर अस्मिता बजाज ने बताया कि अस्पताल में कॉर्निया ट्रांसप्लांट और रेटिना के विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे मरीजों को फरीदकोट मेडिकल कॉलेज या पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया जाता है.
हैरानी की बात है कि इस अस्पताल को सुपर स्पेशलिस्ट सुविधाओं के उद्देश्य से 5.5 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया था. वर्ष 2014 में इसका उद्घाटन किया गया था. बाद में भी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का मुद्दा सामने आता रहा है.
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि करोड़ों रुपए खर्च करके बनाई गई अलग इमारत में भी मरीजों को वही सामान्य सुविधाएं मिलनी हैं, जो एक सिविल अस्पताल के सामान्य आई विभाग में उपलब्ध होती हैं, तो फिर अलग से सुपर स्पेशलिस्ट आई अस्पताल बनाने का उद्देश्य क्या था?