Advertisement

AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने फिर दिल्ली की बीजेपी सरकार को घेरा, सीएम रेखा गुप्ता से पूछे ये सवाल

सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली की CM रेखा गुप्ता के 1 साल के काम काज पर सवाल उठाया है. उन्होंने मुख्य रूप से नकली यमुना और प्रशासनिक पारदर्शिता के मुद्दे पर सरकार से जबाव मांगा.

Saurabh Bharadwaj
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 14 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:13 AM IST

दिल्ली की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल बढ़ गई जब सौरभ भारद्वाज ने भाजपा सरकार के एक साल के कामकाज पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को सवालों से घेर लिया. उनका कहना है कि जनता को इन मुद्दों पर साफ और विस्तार से जवाब मिलना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ गंभीर मामलों में सरकार की ओर से पर्याप्त पारदर्शिता नहीं दिखाई गई, जिससे लोगों के मन में सवाल खड़े हो रहे हैं.

जनकपुरी हादसे पर उठे सवाल
सौरभ भारद्वाज ने जनकपुरी में सड़क के गड्ढे में गिरकर एक बाइक सवार युवक की मौत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि मंत्रियों ने सुरक्षा इंतजाम होने की बात कही, जबकि यह घटना कथित तौर पर लापरवाही से जुड़ी दिखती है. उन्होंने पूछा कि क्राइम सीन के साथ छेड़छाड़ क्यों हुई, मुख्य ठेकेदार पर कार्रवाई में देरी क्यों हुई, और संबंधित पुलिस थानों ने पीड़ित परिवार की शिकायत पर तुरंत कदम क्यों नहीं उठाया.

'नकली यमुना' और पर्यावरण से जुड़े सवाल
उन्होंने कथित 'नकली यमुना' परियोजना पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि फिल्टर्ड पानी की मेनलाइन को इस काम के लिए खोलने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया, यह स्पष्ट होना चाहिए. साथ ही दिवाली की रात वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग स्टेशन बंद करने और पानी के छिड़काव से आंकड़ों पर असर डालने के आरोपों पर भी जवाब मांगा गया.

स्कूल फीस और प्रशासनिक पारदर्शिता
सौरभ भारद्वाज ने निजी स्कूलों की बढ़ी फीस को लेकर पूछा कि कितने अभिभावकों को राहत मिली. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अदालत के आदेश के बावजूद ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई. इस मामले में जुड़े लोगों और प्रशासन की भूमिका पर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की गई.

रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं पर चिंता
उन्होंने कृत्रिम बारिश पर खर्च, बस मार्शलों की बहाली में देरी और सरकारी अस्पतालों के निजीकरण जैसे मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा. उनका कहना है कि इन फैसलों का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है, इसलिए पारदर्शिता जरूरी है.

 

ये भी पढ़ें 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement