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Firozabad News: पहले बनवाओ नया पर्चा तब करेंगे इलाज, पुत्र रह गया पर्ची बनवाने में, पिता ने स्ट्रेचर पर ही तोड़ दिया दम

अक्सर कहा जाता है कि अस्पतालों में मरीज का ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन फिरोजाबाद के एक किस्से ने इसे सच साबित कर दिया. जहां केवल एक बीमार की जान केवल इसलिए चली गई, क्योंकि अस्पताल बिना नया पर्चा बनाए उसका इलाज करने के लिए तैयार नहीं था.

मृतक के पुत्र दिलीप
सुधीर शर्मा
  • फिरोजाबाद,
  • 08 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:36 PM IST

फिरोजाबाद के 200 बेड वाले अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे 55 वर्षीय मरीज महावीर सिंह की स्ट्रेचर पर ही मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि मरीज की हालत गंभीर होने के बावजूद अस्पताल स्टाफ इलाज शुरू करने के बजाय नया पर्चा बनवाने पर जोर देता रहा. परिजन पर्चा बनवाने के लिए भागते रहे और इसी बीच गंभीर हालत में मरीज ने स्ट्रेचर पर दम तोड़ दिया. मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए स्ट्रेचर पर शव रखकर प्रदर्शन किया. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाया, जिसके बाद मामला शांत हुआ.

पहले पर्चा बनवाओ फिर होगा इलाज

नारखी क्षेत्र के गांव आतीपुर निवासी महावीर सिंह की रविवार दोपहर अचानक तबीयत बिगड़ गई थी. पुत्र दिलीप के मुताबिक, पिता के सीने में तेज दर्द था और कफ के साथ खून भी आ रहा था. वह उन्हें ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे. वहां बेड खाली नहीं होने की बात कहकर इमरजेंसी में बीमार को ड्रिप लगाई गई और दवा देने के बाद शाम करीब छह बजे घर भेज दिया गया. साथ ही  सोमवार को दोबारा अस्पताल आने के लिए कहा गया.

बिना नए पर्चे के नहीं शुरू किया इलाज

उनके पुत्र दिलीप का कहना है कि सोमवार को परिजन महावीर सिंह को लेकर अस्पताल पहुंचे.  उन्होंने रविवार को ट्रॉमा सेंटर में बने पर्चे और डॉक्टरों की अन्य पर्चियां स्टाफ को दिखाईं, लेकिन उनसे नया पर्चा बनवाने को कहा गया. परिजनों के मुताबिक, स्टाफ ने कहा कि नया पर्चा बनने के बाद ही मरीज को भर्ती किया जाएगा और इलाज शुरू होगा.

जब तक आया नया पर्चा, तब तक तोड़ दिया दम

पिता की हालत बिगड़ती देख दिलीप स्टाफ से इलाज शुरू करने की गुहार लगाते रहे, लेकिन उन्हें पर्चा बनवाने के लिए भेज दिया गया. मजबूरी में वह अपने छोटे भाई को पिता के पास छोड़कर पर्चा बनवाने चले गए. कुछ देर बाद जब वह पर्चा लेकर लौटे तो उनके पिता की सांसें थम चुकी थीं.

पुलिस ने मौके पर पहुंच संभाला मामला

मौत की खबर मिलते ही परिजनों में आक्रोश फैल गया. उन्होंने अस्पताल में हंगामा करते हुए शव को स्ट्रेचर पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया. परिजनों की चीख-पुकार से अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई. सूचना पर ट्रॉमा सेंटर चौकी प्रभारी शुभम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाकर शांत कराया. बाद में परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए शव को घर ले गए.

मृतक के पुत्र दिलीप का आरोप है कि यदि पिता को समय रहते उपचार मिल जाता तो उनकी जान बच सकती थी. मेडिकल कॉलेज के कर्मियो के व्यवहार व स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल तो खड़े कर ही दिए हैं.

 

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