हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में एक बड़े भ्रष्टाचार मामले ने हलचल बढ़ा दी है. 1995 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डी. सुरेश के खिलाफ रिटायरमेंट से महज पांच दिन पहले भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई है. एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB ने मुख्य सचिव से मंजूरी मिलने के बाद 26 अगस्त को यह केस दर्ज किया. मामला गुरुग्राम के सेक्टर-23 स्थित HSVP के 500 गज के प्लॉट से जुड़ा है. आरोप है कि करोड़ों रुपये की कीमत वाली जमीन को बेहद कम कीमत पर बहाल कर दिया गया.
₹3.5 करोड़ के प्लॉट को ₹6.71 लाख में देने का आरोप
एफआईआर के मुताबिक, सेक्टर-23 के इस 500 गज के प्लॉट की बाजार कीमत करीब ₹3.5 करोड़ थी, जबकि इसका कलेक्टर रेट करीब ₹1.75 करोड़ था. आरोप है कि इस प्लॉट का मालिकाना हक महज ₹6.71 लाख में देने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई. इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान होने का आरोप है.
1988 के डिफॉल्ट प्लॉट से जुड़ा है मामला
मामले की शुरुआत साल 1988 में हुए एक प्लॉट आवंटन से बताई गई है. बकाया राशि का भुगतान नहीं होने पर HSVP ने साल 2002 में इस प्लॉट को जब्त कर लिया था. इसके बाद करीब सात साल तक चली विजिलेंस जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया.
जांच के अनुसार, अधिकारियों और कर्मचारियों ने किसी दूसरे प्लॉट की बहाली से जुड़े अदालती आदेश का सहारा लेकर कथित तौर पर फर्जी नोटशीट तैयार की. आरोप है कि मार्च 2019 में तत्कालीन चीफ एडमिनिस्ट्रेटर डी. सुरेश ने इसी आधार पर डिफॉल्ट प्लॉट की जब्ती रद्द कर दी.
9 लोगों को बनाया गया आरोपी
एफआईआर में डी. सुरेश के अलावा तत्कालीन संपदा अधिकारी मुकेश कुमार समेत कुल 9 लोगों को आरोपी बनाया गया है. आरोप है कि प्लॉट की कन्वेयन्स डीड बेहद कम कीमत पर कराकर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया.
हाईकोर्ट से डी. सुरेश को अंतरिम राहत
मामले में डी. सुरेश को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से अंतरिम राहत भी मिली है. कोर्ट ने कहा है कि हिरासत में लेने से पहले उन्हें कम से कम 7 दिन का नोटिस देना होगा. मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी. खास बात यह है कि डी. सुरेश 31 अगस्त को रिटायर हुए. उनके रिटायरमेंट से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई ने हरियाणा के प्रशासनिक महकमे में चर्चाओं को तेज कर दिया है.
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