Advertisement

हिमाचल में IPS अधिकारी की बार-बार छुट्टी पर कार्रवाई, DGP ने अधीनस्थ अधिकारी को सौंपी जिम्मेदारी

हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में एक अहम प्रशासनिक फैसला लिया गया है. बार-बार छुट्टी पर रहने के कारण आईपीएस अधिकारी अदिति सिंह की जिम्मेदारियां अब उनके अधीनस्थ अधिकारी को सौंप दी गई है, ताकि विभागीय कामकाज बिना किसी बाधा के जारी रह सके.

अदिति सिंह की जिम्मेदारियां उनके अधीनस्थ को दी गई. Photo ITG
gnttv.com
  • शिमला,
  • 25 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:32 PM IST

हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में एक अहम प्रशासनिक फैसला लिया गया है. बार-बार छुट्टी पर रहने के कारण आईपीएस अधिकारी अदिति सिंह की जिम्मेदारियां अब उनके अधीनस्थ अधिकारी को सौंप दी गई है, ताकि विभागीय कामकाज बिना किसी बाधा के जारी रह सके. चलिए आपको बताते हैं पूरा मामला क्या है.

हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक तिवारी ने एक विशेष आदेश जारी करते हुए 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी अदिति सिंह की जिम्मेदारियों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. अदिति सिंह वर्तमान में स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) की उत्तरी रेंज, धर्मशाला में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात हैं. विभागीय जानकारी के अनुसार, वे 8 जनवरी से 22 फरवरी के बीच कुल 25 दिनों की छुट्टी पर रहीं. उनकी लगातार अनुपस्थिति के कारण कार्यालय के कामकाज पर असर पड़ रहा था. जिसे मद्देनजर रखते हुए ये फैसला लिया गया है.

पुलिस अधीक्षक ब्रह्म दास भाटिया को जिम्मेदारियां सौंपी
स्थिति को देखते हुए डीजीपी ने आदेश दिया है कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ब्रह्म दास भाटिया को उनकी जिम्मेदारियां सौंपी जाएं. आदेश के अनुसार, भाटिया अगले आदेश तक उनके कार्यों की निगरानी और संचालन करेंगे. इतना ही नहीं, जब अदिति सिंह मुख्यालय में उपस्थित भी रहेंगी, तब भी भाटिया उनके साथ जुड़े रहेंगे ताकि कामकाज की निरंतरता बनी रहे.

पहले भी मिड-कैरियर इंटरैक्शन में थी गायब
DGP के इस आदेश को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है. आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पहले दिसंबर महीने में भी अदिति सिंह एक आधिकारिक मिड-कैरियर इंटरैक्शन प्रोग्राम के लिए नैनीताल गई थीं, जिसके कारण उस दौरान भी वे मुख्यालय से अनुपस्थित रहीं. पुलिस विभाग के सूत्रों के अनुसार, यह कदम प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और महत्वपूर्ण मामलों में किसी भी तरह की देरी से बचने के लिए उठाया गया है. विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से निगरानी और भ्रष्टाचार विरोधी कार्यों की गति प्रभावित नहीं होगी और कामकाज सुचारू रूप से चलता रहेगा.

रिपोर्टर: अमन भारद्वाज

ये भी पढ़ें: 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement