पिता का अधूरा सपना बेटी ने किया पूरा…चाय की दुकान से शुरू हुआ सफर, अब सहारनपुर की नंदिनी वर्ल्ड कप के लिए इंडियन टीम में चयनित

नंदिनी का सफर आसान नहीं रहा. उनके पिता श्याम सुंदर शर्मा कभी चाय की दुकान चलाते थे. बाद में परिवार की जिम्मेदारियों के चलते उन्हें चंडीगढ़ जाकर वेल्डिंग का काम करना पड़ा. खुद क्रिकेटर बनने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने बेटी के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया.

Nandini Sharma
gnttv.com
  • सहारनपुर ,
  • 13 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:29 PM IST

सहारनपुर का छोटा सा रणदेवा गांव अब देश-दुनिया के क्रिकेट नक्शे पर चमकने जा रहा है. गांव की बेटी नंदिनी शर्मा का चयन भारतीय महिला टी-20 वर्ल्ड कप टीम में तेज गेंदबाज के रूप में हुआ है. जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई. ढोल बजे, मिठाइयां बांटी गईं और लोगों ने गर्व से कहा- 'हमारी बेटी अब भारत के लिए खेलेगी.'

चाय की दुकान से शुरू हुआ सपना, बेटी ने पूरा किया
नंदिनी का सफर आसान नहीं रहा. उनके पिता श्याम सुंदर शर्मा कभी चाय की दुकान चलाते थे. बाद में परिवार की जिम्मेदारियों के चलते उन्हें चंडीगढ़ जाकर वेल्डिंग का काम करना पड़ा. खुद क्रिकेटर बनने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने बेटी के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया. छोटी उम्र से ही नंदिनी को क्रिकेट की प्रैक्टिस कराई गई. चंडीगढ़ की गलियों और मैदानों में घंटों गेंदबाजी करते-करते नंदिनी ने अपनी पहचान बनाई और जल्द ही उनका चयन चंडीगढ़ टीम में हो गया.

WPL में मचाया धमाल, अब टीम इंडिया में एंट्री
नंदिनी ने वूमेंस प्रीमियर लीग में Delhi Capitals Women की ओर से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया. गुजरात के खिलाफ एक मैच में उन्होंने हैट्रिक सहित पांच विकेट लेकर क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था.

उनकी तेज रफ्तार गेंदबाजी और लगातार शानदार प्रदर्शन का इनाम अब वर्ल्ड कप टीम में चयन के रूप में मिला है. पूरे सहारनपुर के लिए यह गर्व का पल बन गया है.

हमें पहले से भरोसा था
नंदिनी के ताऊ और पूर्व प्रधान सतीश भट्ट बताते हैं कि बचपन से ही नंदिनी बाकी बच्चों से अलग थीं. गांव में जब दूसरे बच्चे सामान्य खेल खेलते थे, तब नंदिनी हाथ में गेंद लेकर तेज रनअप के साथ गेंदबाजी करती थीं. उन्होंने बताया कि 9 मार्च को गांव के मेले में जब किसी ने नंदिनी से पूछा था कि क्या वह टीम इंडिया तक पहुंच सकती हैं, तब उन्होंने मुस्कुराकर कहा था. 'अगर मेरी मेहनत का सही आकलन हुआ, तो मैं जरूर भारतीय टीम तक पहुंचूंगी.' अब उनकी वही बात सच साबित हो गई.

गांव की बेटियों के लिए बनी प्रेरणा
नंदिनी की सफलता का असर अब गांव में साफ दिखाई दे रहा है. गांव की कई लड़कियां क्रिकेट खेलने लगी हैं. छोटी बच्चियां खुद को नंदिनी शर्मा कहकर बुलाती हैं, जबकि बच्चे बैट-बॉल लेकर मैदान में उतरने लगे हैं.

परिवार का कहना है कि नंदिनी सिर्फ क्रिकेट नहीं खेल रहीं, बल्कि पूरे इलाके की बेटियों को बड़े सपने देखने की हिम्मत दे रही हैं. सहारनपुर की यह बेटी अब संघर्ष, मेहनत और सपनों की नई पहचान बन चुकी है.

-अनिल कुमार भारद्वाज की रिपोर्ट

 

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