मध्यप्रदेश में पहाड़ों की परी के नाम से विख्यात पन्ना की पर्वतारोही बेटी गौरी अरजरिया एक बार फिर पन्ना और प्रदेश को गौरवान्वित करने की तैयारी में हैं. गौरी गणतंत्र दिवस पर एक बार फिर कड़कड़ाती ठंड ओर विपरीत परिस्थितियों में उत्तराखंड में 13500 फीट ऊंची चंद्रशिला की चोटी पर ध्वजारोहण करने जा रही हैं. इस मौके पर गौरी ने राष्ट्रगान कर अमृत महोत्सव मनाने की ठानी हैं.
गौरी अपने अगले मिशन के लिए तैयारियों में जुटी हैं. गौरी अपने आप को फिट रखने के लिए हर रोज 10 किलोमीटर की रनिंग, साइक्लिंग और सूर्य नमस्कार कर रहीं है. गौरी ने चंद्रशिला पीक पर जाने से पहले जीएनटी से खास बात करते हुए एवरेस्ट फतह करने का संकल्प दोहराया है. इस बीच गौरी अरजरिया की सफलता के लिए पन्ना के जिला कलेक्टर संजय कुमार मिश्रा ने शुभकामनाएं दी है.
इसके पहले भी गौरी ने देश के कई नामचीन पहाड़ों पर चढ़ाई कर देश के तिरंगे को फहरा पन्ना और मध्यप्रदेश का मान बढ़ाया है. पन्ना जिले के सिमरिया की इस किसान की बेटी ने इससे पहले पश्चिम बंगाल में स्थित रेनोक की चोटी को फतह किया था जिसकी ऊंचाई 17 हजार फीट थी. उसके बाद देश में कोरोना संक्रमण बढ़ने के कारण वह दो साल कुछ नहीं कर सकी और उसे घर पर ही रहना पड़ा. लेकिन जैसे ही कोविड से थोड़ी सी राहत मिली तो गौरी ने 26 जनवरी 2021 में उत्तरकाशी के केतार कांठा पर्वत पर तिरंगा फहराया. इस चोटी की ऊंचाई 12500 फीट है जहां गौरी ने माइनस 20 डिग्री के तापमान में खड़े होकर राष्ट्रगान किया. गौरी ने अक्टूबर 2021 में बिधान चंद्र रॉय पर्वत की 18000 ऊंची चोटी पर चढ़ाई कर तीसरी उपलब्धि हासिल की और देश में सुर्खियां बटोरी.
पन्ना जिला प्रसाशन ने गौरी को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का ब्रांड एम्बेसडर बनाया था. अब गौरी आगामी 26 जनवरी को पन्ना और प्रदेश वासियों की तरफ से चंद्रशिला पीक पर ध्वजारोहण कर राष्ट्रीय पर्व मनाने जा रही है. इस समय गौरी हीरा नगरी पन्ना की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एंबेसडर भी हैं. गौरी का लक्ष्य विदेशों के सबसे ऊंचे पहाड़ों पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज को फ़हराना है. गौरी का सपना विश्व के सबसे ऊंचे पहाड़ की चोटी पर तिरंगा लहरा राष्ट्र गायन कर अपने देश का नाम रोशन करना है. वह एवरेस्ट की चोटी पर भी तिरंगा फहराना चाहती है जिसके लिए उसने आगे कदम बढ़ा दिए हैं. गौरी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ पर्वतारोही बनना चाहती है.
मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है. पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है.
पन्ना जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर सिमरिया गांव के एक छोटे से किसान के घर जन्मी गौरी अब पन्ना जिले की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम की ब्रांड एंबेसडर हैं. गौरी के परिवार में उसकी दादी, मम्मी-पापा और दो छोटे भाइयों के साथ वह सबसे बड़ी है. उनके पिता एक छोटे काश्तकार हैं जो खेती किसानी करते हैं. गौरी खुद एक ब्यूटीशियन हैं जो अपने गांव सिमरिया में चार-पांच साल से
ब्यूटी पार्लर चलाती हैं और उससे जो पैसे कमाती हैं उससे वह पर्वतारोहण के लिए जरूरी ट्रेनिंग में खर्च कर देती हैं.
गौरी ने बीएससी करने के बाद डी ऐड किया और डीसीए भी किया है. गौरी के पिता का सपना था कि बेटी पुलिस की नौकरी करे. लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया और लगातार चार कोशिशों के बाद भी गौरी को पुलिस की जॉब नहीं मिल सकी. लेकिन कहते हैं कि...
पसीने की स्याही से जो लिखते है इरादों को, उनके मुकद्दर के सफेद पन्ने कभी कोरे नहीं होते. गौरी ने चंद्रशिला पीक पर जाने से पहले जीएनटी से खास बात करते हुए एवरेस्ट फतह करने का संकल्प दोहराया है.
गौरी अरजरिया कहती हैं, 'मैं आज उत्तराखंड के चंद्रशिला पीक पर जा रही हूं. मुझे जिला प्रशासन और कलेक्टर महोदय से भरपूर स्नेह और आशीर्वाद मिला है. क्षेत्र की जनता से मुझे आशीर्वाद मिला है. मैं अपने मिशन पर जरूर कामयाब हो सकूँगी.'
गौरी के पिता राम कुमार अरजरिया कहते हैं, 'गौरी ने जो उपलब्धि हासिल की है वह अपने दम पर की है. उसने अपनी मेहनत से इस मुकाम को हासिल किया है. हम तो एक किसान हैं. उसके लिए ज्यादा कुछ नहीं कर सके. उसने पार्लर चलाया और अमानगंज में इंग्लिश मीडियम स्कूल में बच्चों को पढ़ाया. उनकी कृपा से और उन्हीं के आशीर्वाद से गौरी आज इस उपलब्धि को हासिल कर रही है.'
(दिलीप शर्मा की रिपोर्ट)