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महिलाओं के लिए बेस्ट है मोदी सरकार की ये योजनाएं, जानें- कैसे मिलता है फायदा

बेटियों की पढ़ाई के लिए सरकारी योजनाओं का महत्व इसके सशक्तिकरण का आधार है, जिससे एक लड़की को दूसरों के बराबर महसूस करने की ताकत मिलती है. बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की कुछ राष्ट्रीय योजनाएं हैं, जो काफी अच्छी हैं और वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं. ताकि बेटियां अपने परिवार पर बोझ न बनें. शिक्षा योजनाओं के साथ, केंद्र सरकार के पास उनके पोषण और मानव तस्करी के खिलाफ योजनाओं के लिए कई महिला सशक्तिकरण योजनाएं बनाई हैं.

पीएम मोदी ने देश की बेटियों के लिए अनेकों योजनाएं बनाई हैं
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 29 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 7:56 PM IST

कहते हैं बेटियां खुदा की रहमत होती है, जिस घर में बेटियां होती हैं वो घर हमेशा गुलज़ार होता है. आज यही बेटियां देश दुनिया में आगे बढ़ रही हैं, नाम कमा रही हैं. बेटियां और आगे बढ़ें इसके लिए देश के प्रधानमंत्री पीएम मोदी ने अलग-अलग योजनाएं भी बनाई हैं, केंद्र सराकर ऐसी कई योजनाएं लेकर आई है, जो सिर्फ महिलाओं के लिए हैं. महिला सशक्तिकरण की दिशा में देश को आगे बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. इसका फायदा  बड़े पैमाने पर महिलाओं को मिल भी रहा है. सरकार की मंशा है कि देश की महिलाएं  पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ें . ऐसे में  हम आपको बताते हैं सरकार की तरफ से शुरू की गई उन योजनाओं के बारे में जिनका फायदा आप आसानी से उठा सकते हैं.  

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना

मोदी सरकार की यह योजना महिलाओं के लिए सबसे सफल योजना है. इसकी शुरूआत  1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया से की गई थी. इस योजना की मदद से आर्थिक रूप से कमजोर गृहणियों को गैस सिलेंडर मुहैया  कराए जाते हैं. जानकारी के मुताबिक, अब तक भारत में 8.3 करोड़ परिवारों को इस योजना के तहत फायदा मिला है. बता दें, इस साल की बजट घोषणा में भी फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने 1 करोड़ और लाभार्थियों को इस योजना का लाभ पहुंचाने की बात कही है.

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन सुमन योजना

प्रसव के दौरान मां और बच्चे का ख्याल रखने के लिए सरकार ने इस योजना की शुरुआत की थी. सुरक्षित मातृत्व आश्वासन सुमन योजना के तहत अस्पतालों और ट्रेंड नर्सों की निगरानी के बीच महिलाओं का प्रसव किया जाता है. ताकि महिला और बच्चे की अच्छी तरह से देखभाल की जा सके. यह योजना 10 अक्टूबर 2019 से शुरू की गई थी. इसके तहत गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए बिना किसी फीस के सरकारी सुविधाएं दी जाती हैं. 

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना

'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को की गई थी. इस योजना का मकसद Girl Sex Ratio में आ रही गिरावट को रोकना है. साथ ही, बच्चियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित कर महिला सशक्तिकरण की ओर ले जाना है. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना उन महिलाओं की मदद करती है, जो घरेलू या किसी भी तरह की हिंसा से पीड़ित हैं. इस योजना के तहत महिलाओं को यह सुविधा दी गई है कि मदद के समय वे कभी भी पुलिस, कानून और चिकित्सा जैसी सुविधाएं ले सकती हैं. बस टोल फ्री नंबर 181 पर फोन करना होगा. 

समर्थ योजना

मोदी सरकार की समर्थ योजना एक महत्वाकांक्षी योजना है. इस योजना के तहत जरूरतमंद महिलाओं को अलग-अलग तरह के वस्त्र उत्पादन की कला और उससे जुड़े कामों के बारे में सिखाया जा रहा है. इसकी मदद से महिलाएं वस्त्र उद्योग में जान फूंक सकें. इससे न केवल ग्लोबल टेक्स्टाइल बिजनेस में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी, बल्कि इसका फायदा महिलाओं को भी मिलेगा.

माध्यमिक शिक्षा के लिए लड़कियों को प्रोत्साहन की राष्ट्रीय योजना

माध्यमिक शिक्षा के लिए 14-18 आयु वर्ग की छात्राओं को सहायता प्रदान करती है, जैसा कि नाम से पता चलता है. कई लड़कियां पारिवारिक दबाव या वित्तीय मुद्दों के कारण आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं. हालांकि, उनके लिए वित्तीय चुनौतियों को कम करने के लिए, सरकार 3,000 रुपये की पेशकश करती है. उन्हें सावधि जमा (एफडी) के रूप में मिलता है. लड़की 18 साल की उम्र के बाद और 10वीं कक्षा की फाइनल परीक्षा पास करने पर ब्याज सहित पैसे निकाल सकती है. यह योजना मई 2008 में शुरू की गई थी. यह योजना विशेष रूप से अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति की लड़कियों के लिए तैयार की गई है. इसके अतिरिक्त, सभी लड़कियां, (सामान्य उम्मीदवारों के साथ) जो कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों से आठवीं कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण करती हैं और नौवीं कक्षा में दाखिला लेती हैं. नौवीं कक्षा में शामिल होने पर इन लड़कियों की आयु 16 वर्ष से कम होनी चाहिए. हालांकि, विवाहित लड़कियों, या निजी स्कूलों में छात्रों और केंद्र सरकार (केवीएस, एनवीएस) और सीबीएस से संबद्ध स्कूलों द्वारा संचालित स्कूलों में नामांकित छात्राओं को बाहर रखा जाता है. राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) योजना के लाभार्थियों की जांच करने के लिए आधिकारिक साइट है.

किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए राजीव गांधी योजना (RGSEG)

11-18 वर्ष की आयु की लड़कियों को पोषण, स्वास्थ्य देखभाल, और जीवन कौशल शिक्षा के जरिए उन्हें सशक्त किया जाता है. केंद्र सरकार को लगा कि बेटों की तुलना में बेटियां और महिलाएं पोषण की कमी से पीड़ित रहती हैं. इस अंतर को कम करने के लिए, सरकार ने छात्राओं के लिए शिक्षा संबंधी योजनाओं के साथ-साथ इन योजनाओं की शुरुआत की. लड़कियों को स्वास्थ्य जांच और रेफरल सेवाओं के साथ-साथ वर्ष में 300 दिनों के लिए प्रति दिन पर्याप्त कैलोरी, प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्व पूरक पोषण प्रदान किया जाता है. गैर-पोषण खंड के तहत, सरकार किशोरियों को प्रशिक्षण प्रदान करती है. रिपोर्टों के अनुसार, इस योजना के तहत प्रति वर्ष लगभग 100 लाख किशोरियों के लाभान्वित होने की उम्मीद है.


 

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