झारखंड के हजारीबाग जिले में सामने आए ट्रेजरी घोटाले ने प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया है. बोकारो के बाद उजागर हुए इस मामले में पुलिस विभाग के वेतन और भत्तों के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का खुलासा हुआ है. प्रारंभिक जांच में 15.41 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई थी, जो विस्तृत जांच के बाद बढ़कर करीब 27-28 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. यह घोटाला पिछले 8 वर्षों से लगातार चल रहा था.
कई बैंक खातों के जरिए की हेराफेरी
जांच में खुलासा हुआ कि पुलिस लाइन के अकाउंट्स ब्रांच में तैनात सिपाही शंभू कुमार, रजनीश सिंह (उर्फ पंकज) और धीरेंद्र सिंह ने फर्जी पे-आईडी, टेम्परेरी आईडी और कई बैंक खातों के जरिए यह हेराफेरी की. मृत और रिटायर्ड कर्मियों के नाम पर भी राशि निकाली गई. एक चौंकाने वाले मामले में 25 महीनों में एक ही व्यक्ति के नाम पर 63 बार वेतन निकासी की गई.
‘मार्केटिंग’ के नाम पर फ्लाइट से मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली जाता था
मुख्य आरोपी शंभू कुमार को इस घोटाले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है. उसने अवैध कमाई से गया में आलीशान मकान बनाए और लग्जरी जीवनशैली अपनाई. शंभू हर 15 दिन में ‘मार्केटिंग’ के नाम पर अपनी इनोवा कार से शनिवार को हजारीबाग से निकलता था, रांची में गाड़ी खड़ी कर फ्लाइट से मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली जाता था. सोमवार तक लौटकर फिर ड्यूटी जॉइन कर लेता था. पिछले एक महीने से वह लोगों से कटा-कटा रहने लगा था, जिससे संदेह और गहराया.
हजारीबाग डीसी शशि प्रकाश सिंह ने छह सदस्यीय स्पेशल टास्क फोर्स गठित की, जो आरोपियों की संपत्तियों (खासकर बिहार में) की जांच कर रही है. कुछ खातों को फ्रीज कर दिया गया.
कई बैंक खाते फ्रीज किए गए
पुलिस ने तीनों सिपाहियों के साथ उनकी पत्नियों को भी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. प्रशासन ने विशेष जांच टीम गठित कर आरोपियों की संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है, जबकि कई बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं. इस घोटाले के बाद राज्य सरकार ने सभी जिलों की ट्रेजरी जांच के आदेश दिए हैं. विपक्ष ने इसे बड़ा घोटाला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. मामला अभी जांच के अधीन है और इसमें और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है.
-बिस्मय अलंकार की रिपोर्ट
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