वफादारी की कोई भाषा नहीं होती... मालिक की अंतिम यात्रा में पालतू डॉगी ने त्याग दिए प्राण, परिवार हुआ पूरी तरह भावुक

बैतूल में एक ऐसी कहानी सामने आई हैं, जहां बेजुबान और इंसान के बीच के रिश्ते ने लोगों को भावुक कर दिया. यहां एक पालतू डॉगी ने अपने मालिक का साथ ऐसा निभाया कि अंतिम यात्रा में भी उनसे बिछड़ नहीं पाया और उसने भी दम तोड़ दिया. दोनों का एक साथ हुआ अंतिम संस्कार.

मृतक प्रदीप डुग्गू के साथ
gnttv.com
  • बैतूल,
  • 13 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:43 PM IST

मध्य प्रदेश के बैतूल शहर में इंसान और उसके पालतू साथी के बीच अटूट रिश्ते की एक भावुक तस्वीर सामने आई है. सिविल लाइन निवासी 67 वर्षीय प्रदीप जैन का उपचार के दौरान निधन हो गया. जैसे ही उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा, वैसे ही वर्षों से साथ रह रहा पालतू डॉगी लगातार उनके पास बैठ गया. 

उनके इस पालतू डॉगी का नाम डूग्गू था. डुग्गू पूरी रात मालिक के पार्थिव शरीर के पास बैचेन बैठा रहा, बीच-बीच वह उनके पास जाने की भी कोशिश करता था. लेकिन सोमवार को जैसे ही मालिक की अंतिम यात्रा निकली डुग्गू के साथ कुछ ऐसा हुआ कि हर कोई इस बात को जान भावुक हो रहा है.

कौन था डुग्गू?

मृतक के भाई दिलीप जैन का कहना है कि उनके बड़े भाई ने छोटे से डॉगी को पाला था. उन्होंने उसका प्यार से नाम डुग्गू रखा था, दोनों के बीच ऐसा रिश्ता था कि जब बड़े भाई घर आते थे तो वह दौड़कर उनके पास आ जाता था. डुग्गू में इतने संस्कार थे कि वह  परिवार के लोगों के पैर भी छूता था. बड़े भाई से तो इतना लगाव था कि जब कभी वे बीमार होते थे तो वह भी बीमार हो जाता था. 

डुग्गू ने नहीं छोड़ा आखिरी समय भी साथ

जिस दिन डुग्गू के मालिक प्रदीप दुनिया को छोड़ कर जा रहे थे. यानी उनकी अंतिम यात्रा निकाली जा रही थी. उस समय डुग्गू भी अंतिम यात्रा में शामिल था. लेकिन डुग्गू केवल कुछ दूर तक ही साथ चला, और उसके बाद डुग्गू ने भी अपना देह त्याग दिया.

डुग्गू को भी मिला पूरा सम्मान

परिवार ने अपने इस वफादार साथी को भी सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी. मालिक का अंतिम संस्कार किया गया, जबकि डॉगी को श्मशान परिसर के समीप पूरे सम्मान के साथ दफनाया गया. अंतिम यात्रा में मौजूद लोग इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे.

परिजन दिलीप जैन का कहना है कि डॉगी डुग्गू करीब 15 साल से परिवार का हिस्सा था. बड़े भाई से उसका गहरा लगाव था. उनके बिना वह कभी नहीं रहता था. आखिरी समय तक उसने उनका साथ नहीं छोड़ा.

(राजेश भाटिया की रिपोर्ट)

 

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